दिघलबैंक : प्रखंड के पश्चिमी क्षेत्र को प्रखंड मुख्यालय से जोड़ने वाली दोगिरजा कनकई मरियाधार पर बन रहा पक्का पुल पर इन दिनों कछुआ की गति से कार्य हो रहा है. इस वर्ष भी पश्चिमी क्षेत्र के लोगों को चचरी पुल या फिर केला थाम पर नदी पार करना पड़ेगा. पश्चिमी क्षेत्र के लाइफ लाइन कही जाने वाली एक मात्र सड़क टप्पू चौक से लोहागाड़ा भाया दोगिरजा, तालगाछ सड़क अपने उद्धारक के इंतजार में बाट जोह रही है़
प्रखंड के सबसे पिछड़ा पंचायत सतकौआ एवं लोहागाड़ा के लोगों को प्रखंड मुख्यालय या जिला मुख्यालय तक जोड़ने वाली इस सड़क की मांग तो वर्षों से की जा रही थी़ वर्ष 2014 में दोगिरजा गांव के सैकड़ों लोगों ने टप्पू-बहादुरगंज सड़क को जाम किया और टप्पू से लोहागाड़ा तक सड़क एवं पुल की मांग की़ आवाम के प्रयास के बाद प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना अंतर्गत इस सड़क और पुल की स्वीकृति मिल गयी़ स्थानीय सांसद मौलाना असरारूल हक कासमी ने 15 नवंबर 14 को इस सड़क का शिलान्यास किया़ शिलान्यास के दो वर्ष के बाद भी स्थिति जस की तस है़ दोगिरजा शेरशाहवादी गांव में बनाये जा रहे पुल में संवेदक द्वारा मनमानी साफ तौर पर दिख रही है़
पुल की लागत दो करोड़ 43 हजार 99 रूपये से बनाया जा रहा है़ इसका कार्य प्रारंभ 9.9.14 से शुरू हुआ और समाप्त की तिथि 9.9.15 था दो वर्ष बीतजाने के बावजूद भी इस पुल का काम पूरा नहीं हुआ है़ लोग आज भी पानी तैर कर या फिर चचरी का पुल निर्माण कर अपने गंतव्य तक पहुंचते है़ स्थानीय निवासी पूर्व सरपंच फरीद उद्दीन, पंसस मिस्ताहुल, जियाउल हक, जुबेर आलम, मनीरउद्दीन, नसीरउद्दीन सहित अन्य लोग बताते है कि पुल निर्माण कार्य देख कर लोगों के चेहरे पर खुशी व्याप्त थी़ अब लोग समझने लगे थे कि उनकी परेशानी पिछड़ापन कर समय समाप्त होगा मगर संवेदक एमएस जेएसआर कंस्ट्रक्शन एवं कुछ समाज के ठेकेदारों की मिलीभगत से समस्या तस की तस है़
ग्रामीणों हालात ऐसी है कि मरिया कनकई नदी के कारण यह गांव दो हिस्सा में बंट गया है़ गांव के दोनों ओर नदी ही है़ पीछे नैनभीट्ठा घाट वहां भी पुल तैयार नहीं है़ बरसात के दिनों में ये गांव टापू में तब्दील हो जाता है़ गांव से बाहर जाने का कोई भी साधन नहीं है़ दोगिरजा,तालगाछ, हल्दावन, वृंदावन, तालगाछ कामत,नेनभिट्ठा के लोगों एवं छात्र छात्राओं को स्कूल जाना पड़ता है. लौहागाड़ा के पूर्व सरपंच विपीन मोहन यादव, समाज सेवी धीरज कुमार ने कहा कि निर्माण कार्य धीरे होने के कारण सालों बीत जाने के बाद भी पुल निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है.
