सितंबर में होने वाली बारिश पर टिकी है किसानों की निगाह
अररिया : सम के पल-पल बदलते रुख ने जिले के किसानों को चिंतित कर दिया है. जुलाई में ऐसी मूसलधार बारिश हुई कि जिले के नौ में से सात प्रखंड भीषण बाढ़ की चपेट में आ गये. धान की लगी फसलों की भारी क्षति हुई. अब अगस्त में इतनी कम बारिश हुई कि धान की बाढ़ से बची फसल भी सूखने की कगार पर है.
वर्षापात के आंकड़े भी इसी ओर इशारा कर रहे हैं. जानकार कहते हैं कि अब सब कुछ सितंबर में होनी वाली बारिश पर निर्भर है. जिला सांख्यिकी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जुलाई में जिले में औसतन 440 एमएम वर्षा होनी चाहिए थी, पर बारिश इतनी अधिक हुई कि वर्षापात का औसत 500 एमएम को पार कर गया. बताया जाता है कि जुलाई में निर्धारित औसत के विरुद्ध लगभग 135 एमएम बारिश हो गयी थी.
बारिश व अन्य कारणों से आयी बाढ़ में जहां दो दर्जन के करीब लोगों की जान चली गयी थी. वहीं धान की फसल हो खासा नुकसान हो गया था. बुधवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में खुद डीएम ने बताया था कि फसल क्षति के सर्वे का काम चल रहा है. फिलहाल दो हजार हेक्टेयर में फसल क्षति की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है.
