फर्जी जन्म प्रमाण पत्र. कहीं नगर परिषद के कर्मियों की चूक तो नहीं ?
फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाये जाने के मामले में अब तक जिन आवेदकों के जन्म प्रमाण पत्र का सत्यापन हुआ है उसमें से कुछ लोगों के जन्म प्रमाण पत्र का पंजीयन संख्या नगर परिषद द्वारा जारी जन्म प्रमाण से मिल रहा है. हालांकि नप द्वारा निर्गत किये गये जन्म प्रमाण पत्र में व फर्जी पाये गये जन्म प्रमाण पत्र में अंकित नाम में अंतर है.
अररिया : पासपोर्ट कार्यालय द्वारा सत्यापन के लिए भेजे गये जन्म प्रमाण पत्र के फर्जी पाये जाने पर भले ही नगर परिषद द्वारा पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर जांच की आवश्यकता बताकर छुट्टी ले ली गयी है. नगर परिषद कार्यालय द्वारा पत्रांक 2330 दिनांक चार दिसंबर 2015 व पत्रांक 2244 दिनांक 20 नवंबर 2015 को ही पुलिस अधीक्षक को भेजा गया. पत्र भेजे जाने के आठ माह बाद भी नगर परिषद ने उन भेजे गये पत्रों पर हुई कार्रवाई की सुधी क्यों नहीं ली. लोगों की माने तो फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह नगर परिषद के ही कुछ कर्मियों से मिली भगत से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाकर अपना हित साध रहे हैं. चर्चा तो यह भी चल रही है कि नगर परिषद द्वारा क्यों नहीं इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई की गयी.
पुलिस अब तक नहीं हुई सतर्क
नकली को असली बनाने वालों की नहीं है कमी
फारबिसगंज में दर्ज फर्जी पासपोर्ट मामले में जिस गवाह के नाम पर पासपोर्ट इश्यू किया गया था. गवाही देने वालों के बारे में मास्टर माइंड अकबर ने पुलिस को बताया था कि उसने ही गवाह शहाबुद्दीन के पहचान पत्र में छेड़छाड़ कर शहाबुद्दीन बनकर तथा मो समीर के पहचान पत्र में छेड़छाड़ कर त्रिवेणीगंज के वसीम नामक युवक को समीर बनाकर रहीम मो मजेबुल के नाम पता पर बनाये जा रहे पासपोर्ट में गवाही की थी. जबकि मजेबुल के पहचान पत्र से छेड़छाड़ कर रहीम का बनाया गया पहचान पत्र भी किसी साइबर कैफे का ही करामत था. कंप्यूटर व स्केनिंग की दुनिया में ऐसे कारनामे देखने को मिल रहे हैं. सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या नगर परिषद के जन्म प्रमाण पत्र के हुबहू कॉपी कही ऐसे ही किसी मास्टरमाइंड का तो काम नहीं है. खैर जो भी हो लेकिन इसकी जांच कर ऐसे नकाबपौश को बेनकाब करने की आवश्यकता है. जिससे सिकटी के खोरागाछ का मृत व्यक्ति या चौरा परवाहा के मजेबुल या उन जैसे लोगों के नाम पर फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह बनेकाब हो सके.
पंजीयन संख्या का एक होना पैदा कर रहे हैं कई सवाल
अब तक जिन आवेदकों के जन्म प्रमाण पत्र का सत्यापन हुआ है उसमें से कुछ लोगों के जन्म प्रमाण पत्र का पंजीयन संख्या नगर परिषद द्वारा जारी जन्म प्रमाण से मिल रहा है. हालांकि नप द्वारा निर्गत किये गये जन्म प्रमाण पत्र में व फर्जी पाये गये जन्म प्रमाण पत्र में अंकित नाम में अंतर है. जबकि पदाधिकारी के हस्ताक्षर में अंतर है. लेकिन फर्जी जन्म प्रमाण पत्र में लगा मुहर जिला रिजस्ट्रार जन्म मृत्यु अररिया व सचिव नगर परिषद, जन्म मृत्यु अररिया का मुहर एक है. हालांकि फर्जी जन्म प्रमाण पत्र पर पदाधिकारी का किया गया हस्ताक्षर फर्जी है. आखिरकार फर्जी पाये जा रहे जन्म प्रमाण पत्र का पंजीयन संख्या, रजिस्ट्रार का मुहर व नगर परिषद के सचिव का मुहर उन तक कैसे पहुंचा. जन्म प्रमाण का एक फर्जी पाए गये मामले का आवेदक भरगामा रघुनाथपुर निवासी मो जाबीर है. आश्चर्य की बात तो यह है कि उसने अपने पता में सब कुछ भरगामा का दिखाया है. जबकि उसके जन्म का स्थान तक नगर परिषद नहीं है. आखिरकार कैसे उसे नगर परिषद का पंजीयन संख्या मिल गया. जिस बिना पर वह नप का हुबहू जन्म प्रमाण पत्र बना पाया. कहीं इस कार्य में कर्मियों की मिलीभगत तो नहीं.
कहते हैं कार्यपालक पदाधिकारी
इधर कर्मियों के स्तर पर हुई चूक से इंकार करते हुए कार्यपालक पदाधिकारी ने बताया कि नगर परिषद में जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए आने वाले आवेदकों की गहन छानबीन व स्थल का भौतिक सत्यापन के बाद ही किसी भी प्रकार का जन्म प्रमाण पत्र या मृत्यु प्रमाण पत्र को निर्गत किया जाता है. लेकिन उन्होंने कहा कि उनके द्वारा पुलिस अधीक्षक को भेजे गये पत्र की मंशा यही थी कि गलती जहां भी हुई हो वह दूध-दूध का पानी का पानी स्पष्ट हो पाये.
भवेश कुमार, कार्यपालक पदाधिकारी
