जोगबनी : नेपाल में अध्ययनरत 134 मेडिकल के छात्रों की डिग्री रोके जाने के विरोध में सोमवार को मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने भाजयुमो के साथ मिल भारत नेपाल सीमा में विरोध प्रदर्शन किया. हाथों में तख्तियां लिये छात्रों ने काठमांडू यूनिवर्सिटी मुर्दाबाद व हमारे साथ न्याय करो के नारे लगा रहे थे.
क्या है मामला: भुक्तभोगी विधार्थीयों महावीर गुर्जर व नेहा सैन ने प्रभात खबर से बातचीत में बताया कि नेपाल के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे करीब 134 विधार्थीयों कों काठमांडू यूनिवर्सिटी द्वारा वैमनस्य की भावना से लगातार फेल किया जाता रहा है. लगातार फेल होने के कारन यूनिवर्सिटी द्वारा उन्हे एनएफटी (नॉट फिट फॉर टेक्निकल)करार दे दिया गया है.
किन-किन कॉलेजों के कितने क्षात्रो कों एनएफटी करार दिया गया. काठमांडू यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त दस कॉलेजों में से छह कॉलेजों के 134 क्षात्रो कों एनएफटी करार दिया गया है.
जिनकी सूची इस प्रकार है. मणिपाल कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस, कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस भरतपुर, नेपाल मेडिकल कॉलेज काठमांडू, काठमांडू मेडिकल कॉलेज काठमांडू, नोबेल मेडिकल कॉलेज विराटनगर, नेपालगंज मेडिकल कॉलेज नेपालगंज. इस प्रकार कुल 134 क्षात्रों के भविष्य के साथ काठमांडू यूनिवर्सिटी खिलवाड़ कर रही है.
अपनाया जा रहा है भेदभाव पूर्ण रवैया . वहीं छात्रों का नेतृत्व कर रहे महावीर गुर्जर ने कहा कि इस मामले की जानकारी वे भारतीय दूतावास सहित प्रधानमंत्री कार्यालय भारत सरकार व नेपाल सरकार कों भी दिये हैं.
लेकिन अभी तक कही से भी साकारात्मक पहल होती नही दिख रही है. धीरे-धीरे क्षात्र मानसिक रूप से त्रस्त हो रहे हैं. वहीं नेपाल स्थित मेडिकल कॉलेज के एक अधिकारी ने नाम नही छापने की शर्त पर बताया कि 2015 से पहले छात्रों कों कॉपीयां कॉलेजों में ही बिना किसी भेदभाव के जांच की जाती थी.
लेकिन 2015 के बाद कॉपियां कॉलेजों से जांच के लिये काठमांडू यूनिवर्सिटी जाने लगी. तभी से ही भारतीय छात्रों से भेद-भाव किया जाने लगा. इस मामले में बार-बार कॉलेजों से शिकायत किये जाने के बाद यूनिवर्सिटी द्वारा यही जवाब दिया जाता रहा कि हम विद्यार्थीयों कों यहा पास करने के लिये नही बैठे हैं. इससे एक बात तो साफ होती दिख रही है कि भारतीय छात्रों के साथ पक्षपातपूर्ण रवैया नेपाल में अपनाया जा रहा है व इससे छात्रों का भविष्य अंधेरे में जा रहा है.
भारतीय सब्जियों को नेपाल में बगैर लैब टेस्ट प्रवेश पर प्रतिबंध, भारत को एतराज
जोगबनी : नेपाल सरकार द्वारा भारतीय सब्जियों पर बिना लैब टेस्ट किये नेपाल में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारतीय दूतावास द्वारा इस पर कड़ा प्रतिरोध जताया गया. जिसके 21 दिन बाद नेपाल सरकार द्वारा अपने आदेश को वापस ले लिया गया. लेकिन इसके ठीक तीन दिनों के बाद एक नंबर प्रदेश की सरकार ने पुनः इस नियम को लागू करते हुए बिना लैब टेस्ट के भारतीय सब्जियों को नेपाल में प्रवेश पर रोक लगा दी.
वहीं नेपाल सरकार द्वारा बार-बार बिना किसी पूर्व सूचना के इस प्रकार के नियम को लाने से व्यापारियों को काफी पदेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. जोगबनी स्थित भारतीय सब्जियों के निर्यात मेसर्स केके ट्रेडिंग के कुंदन पोद्दार ने बताया की बार-बार नेपाल सरकार द्वारा इस तरह के नियमों को लाने से हम निर्यातकों मानसिक व आर्थिक दोनों ही तरह की हानी हो रही है.
उन्होंने बताया की लैब टेस्ट करने के लिये हमारे गाड़ियों को दो दिनों तक खड़ा कर दिया जाता है. चुंकी कच्चा माल होने की वजह से सब्जियां खराब होने लगती है जिससे की हमें आर्थिक रूप से नुकशान झेलना पड़ता है.
नेपाल में सब्जी आपूर्ति का 47 प्रतिशत सब्जियां भारत द्वारा ही निर्यात किया जाता है. प्रतिदिन लगभग सौ टन सब्जी भारत से नेपाल निर्यात की जाती है. अगर नेपाल सरकार इस प्रकार के नियम लगाती रहेगी तो इसका खामियाजा नेपाली जनता को ही उठाना पड़ेगा व उन्हे ऊंची कीमतों में सब्जियां खरीदनी पड़ेगी.
नेपाल कस्टम ने नियम को मानने से किया इंकार . वहीं प्रदेश संख्या दो द्वारा जारी किये गये आदेश कों विराटनगर कस्टम कार्यालय ने मानने से इंकार कर दिया है. विराटनगर कस्टम कार्यालय का कहना है की वे सिर्फ केंद्रीय आदेश को ही पालन करने के लिये अधिकृत हैं. वे किसी भी प्रदेश सरकार के आदेश का पालन नहीं करेंगे.
