डायबिटीज पर नियंत्रण पाने के लिए बदलें जीवनशैली
साल दर साल डायबिटीज महामारी का रूप धारण करते जा रहा है. अब यह बीमारी सिर्फ अमीरों व शहरियों तक नहीं सीमित रह गयी है. 16से वर्ष के युवा व आर्थिक रूप से कमजोर लोग भी अब इस रोग के शिकार हो रहे हैं.
अररिया : डायबिटीज रोग पर आम अवाम को जागरूक करने के लिए मीडिया के सहयोग के मद्दे नजर मंगलवार को आयोजित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान सीएस डा एनके ओझा ने कहा कि मधुमेह रोगियों की संख्या में साल दर साल इजाफा हो रहा है. अब ये केवल अमीरों व शहरी लोगों का रोग नहीं रहा गया. ग्रामीण क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. बड़ी संख्या में युवा भी डायबिटीज के शिकार हो रहे हैं. रोग को दूर रखने के लिए जीवन शैली बदलने की जरूरत है. शारीरिक श्रम करना होगा. जीवन को प्रकृति के अनुरूप नियमित करने की जरूरत है.
विश्व मधुमेह दिवस पर सीएस कार्यालय में जिले में रोगियों की तादाद व सरकारी अस्पतालों में जांच व उपचार की सुविधाओं की जानकारी देते हुए सीएस के साथ-साथ सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डा जय नारायण प्रसाद व डीपीएम रेहान अशरफ के बताया कि यह संचारी रोग नहीं है. न ही छुआछूत की बीमारी है, पर यह तेजी से फैल रहा है. बताया गया कि इस साल जनवरी से नवंबर के बीच सदर अस्पताल में रोग के लिए 4546 लोगों की जांच हुई. लगभग 3500 लोग चीनी रोग के शिकार पाये गये.चौंकाने वाली बात ये है कि रोग की चपेट में आने वालों में 16 से 30 वर्ष आयु वर्ग के एक हजार से अधिक लोग मिले.
बताया गया कि सरकारी अस्पतालों में डायबिटीज की दवा उपलब्ध है. सदर अस्पताल में सोमवार व मंगलवार व फारबिसगंज अनुमंडल अस्पताल में बुधवार को विशेष जांच शिविर लगाया जाता है. विभिन्न अध्ययनों का हवाला देते हुए बताया गया कि शारीरिक श्रम के अलावा खान पान पर भी ध्यान देना होगा. वसा युक्त भोजन को कम करना होगा.
तनाव को भी कम करना जरूरी है. कार्यस्थल का तनाव भी रोग पैदा करने का कारण बन सकता है. साथ ही नियमित व्यायाम भी करना चाहिए.
डायबिटीज के मरीजों की स्थिति
4546 लोगों का सदर अस्पताल में हुई जांच
3496 लोग मिले डायबिटीज के रोगी
1024 लोग मिले 16 से 30 वर्ष आयु वर्ग के
अस्पतालों में इलाज की सुविधा
सोमवार व मंगलवार को सदर अस्पताल में जांच
बुधवार को फारबिसगंज अस्पताल में जांच शिविर
अस्पतालों में इंसुलिन सहित सभी दवा उपलब्ध
