पुल को कार्यरत एजेंसी द्वारा सितंबर 2016 में ही विभाग को हैंडओवर करना था. हैंडओवर की अवधि के एक वर्ष पूरा होने के बाद भी अब तक पुल का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है.
अररिया : रक्षा मंत्रालय की अति महत्वपूर्ण पूर्ण इंडो-नेपाल सीमा सड़क भू-माफियाओं के चंगुल में फंस कर लेटलतीफी का शिकार हो रहा है. भारत नेपाल सीमा पर भारतीय सीमा में बन रही सीमा सड़क का लगभग 103 किलोमीटर लंबी सड़क चार भागों में अररिया जिले में बन रही है.
इस सड़क का एक भाग मीरगंज व कुआड़ी के बीच 27 किलोमीटर के प्वाइंट पर गरैया-कुआड़ी के बीच मसनाधार पर लगभग दो वर्षों से यह पुल बन रहा है. जो अब भी अर्द्धनिर्मित है. बताया जाता है कि पुल का निर्माण कार्य भूमि अधिग्रहण के पेंच में फंसा हुआ है.
पुल निगम के कर्मियों से मिली जानकारी के अनुसार इस पुल का प्राक्कलन 5.70 करोड़ का है. जबकि इस पुल को कार्यरत एजेंसी द्वारा सितंबर 2016 में ही विभाग को हैंडओवर करना था. हैंडओवर की अवधि के एक वर्ष पूरे होने के बाद भी अब तक पुल का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है. हालात यह है कि पुल में प्रयुक्त किये गये छड़ हवा व पानी के कारण खराब हो रहा है. स्थानीय ग्रामीण मो असलम, परवेज, तसदीक, अबू तालिब, मो नफीस हैदर आदि के अनुसार इस पुल का निर्माण अगर ससमय पूरा होता तो हाल में आयी बाढ़ में लोगों को इससे लाभ होता. आवागमन भी सुचारू रहता.
कहते हैं कनीय अभियंता
इधर इस संबंध में पूछे जाने पर पुल निगम के कनीय अभियंता कुंदन कुमार ने बताया कि सीमा सड़क में लगभग 25 पुल के निर्माण का जिम्मा पुल निगम के पास था. पुल निगम के द्वारा 24 पुल का निर्माण पूरा करा लिया गया है.
इस ब्रिज स्थल व एप्रोच पथ की जमीन को लेकर भू स्वामियों द्वारा अवरोध उत्पन्न किया गया है. वे मुआवजे की मांग कर रहे हैं. जब तक प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है तब तक पुल का निर्माण कार्य पूरा होना असंभव प्रतीत होता है.
