दौड़ती नहीं रेंगती है गाड़ियां
जाम. चांदनी चौक से जीरो माइल के बीच सजती है दुकानें
शहर के चांदनी चौक, अस्पताल मोड़ व जीरोमाइल पर अतिक्रमण के कारण सड़क सिकुड़ती जा रही है. चौक से जीरो माइल जाना एक कठिन काम हो गया है. चांदनी चौक से लेकर जीरोमाइल तक की दो किलोमीटर दूरी तय करने में 40 मीनट लगता है .
अररिया : शहर के बीचों बीच 327 ई गुजरा है. सड़क पहले की अपेक्षा काफी चौड़ी हो गयी है. सड़क पर बीचों बीच डिवाइडर भी बना है. बावजूद लोगों को पहले की तुलना में अब चांदनी चौक से जीरो माइल जाना एक जटिल काम हो गया है. चांदनी चौक से लेकर जीरोमाइल तक की दूरी महज दो किलोमीटर है. इस बीच में सदर अस्प्ताल व प्रमुख चिकित्सकों के निजी क्लिनिक के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान हैं. इस दो किलोमीटर के बीच मोटे तौर पर चार मुख्य पड़ाव हैं. हाइवे घनी आबादी वाले क्षेत्र के बीच से गुजरती है.
इसके साथ मुख्य बाजार तक पहुंचने का मुख्य रास्ता होने के कारण यह खासा महत्वपूर्ण है. एनएच 327 ई में शामिल किये जाने के बाद तो इसका महत्व और बढ़ गया है. लेकिन महत्व वाले इस सड़क से गुजरना स्थानीय लोगों के साथ अन्य वाहनों के लिए उतनी ही बड़ी चुनौती है. आमतौर पर दो किलोमीटर की दूरी साइकिल व रिक्शा से तय करने में पांच से दस मिनट का समय लगता है. लेकिन हाइवे के इस हिस्से पर बाइक से गुजरने में भी लोगों को तकरीबन चालिस मिनट का समय जाया करना पड़ता है. ज्यादा समय खर्च होने के पीछे की वजह यह है कि सड़क पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा बदस्तूर जारी है. इस कारण सड़क की चौड़ाई कई जगहों पर सिमट कर महज चार से पांच फीट के बीच रह गयी है.
सड़क पर पार्क होते हैं ऑटो
यह सड़क ऑटो चालकों के ठहराव का मुख्य स्थल बन चुका है. चांदनी चौक, अस्पताल मोड के साथ जीरोमाइल चौराहे पर बेतरतीब ढंग से पार्क किये हुए ऑटो हमेशा मिल जाते हैं. कुर्साकांटा, मदनपुर, जोकीहाट, पलासी, सिकटी सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थानों को जाने के लिए सड़क ही ऑटो स्टैंड का रूप ले लिया है. ऑटो चालक यहीं से यात्री उठाते हैं और फिर यहीं अपने यात्रियों को ड्राप करते हैं. ऑटो पार्किंग वाले स्थानों पर तो वाहन चलने की जगह सरकते हुए नजर आते हैं.
जाम में घंटों फंसे रहते हैं एंबुलेंस
हाइवे पर जारी अतिक्रमण लोगों के रफ्तार को प्रभावित करने लगा है. अतिक्रमण के कारण सड़क पर हर दिन घंटों भीषण जाम लगती है. छोटे मोटे वाहनों के जाम में फंसे रहने की तो छोड़े कभी कभी अस्पताल आने वाली एंबुलेंस भी घंटों तक जाम में फंसे रह जाते हैं. सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराने के कई प्रयास भी अब तक हो चुके हैं. लेकिन नतीजा सिफर ही रहा है. जिससे यात्रियों की समस्या यथावत बनी हुई है.
