छपरा.
शुक्रवार की सुबह से शुरू हुई बारिश ने जहां मौसम की सिहरन में इजाफा कर दिया, वहीं आम जन जीवन अस्त -व्यस्त हो गया. पूरे शहर की स्थिति नारकीय हो उठी और स्कूली बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. अधिसंख्य मुहल्लों में जलजमाव की स्थिति रही. इससे शहर की स्थिति नारकीय हो गयी.
लुढ़का पारा
वसंत पंचमी के बाद आम तौर पर ठंड में कमी आ जाती है, परंतु इस वर्ष मौसम की आंख मिचौनी जारी रहने के कारण अभी तक शीत हवाओं का प्रकोप व सिहरन बरकरार थी. दो दिनों से खिलती धूप ने लोगों को मौसम ठीक हो जाने की उम्मीद बधाई, मगर आज शुरू हुई बारिश ने अचानक पारा लुढ़का दिया. शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री रिकॉर्ड किया गया. इस कारण जाती हुई ठंड लौट आयी.
सड़क हुई सुनसान
सुबह से शुरू हुई बारिश का असर शहर की सड़कों पर दिखा, बारिश के कारण सड़कों पर इक्के -दुक्के लोग ही देखे गये. वहीं वाहनों के परिचालन में भी कमी देखी गयी. बहुत जरूरी नहीं होने पर लोगों ने घरों में दुबके रहने में ही भलाई समझी, जिसके नतीजे में शहर की मुख्य सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा.
काम- काज पर भी असर
लोगों के घरों से नहीं निकलने के कारण सरकारी व गैर सरकारी कार्यालयों में काम की रफ्तार धीमी रही. ग्रामीण इलाकों से लोगों के नहीं आने के कारण व्यवहार न्यायालय में भी सन्नाटा पसरा रहा, जबकि बैंक व एटीएम के काउंटर भी आज खाली-खाली दिखे. दूसरी ओर व्यापारिक प्रतिष्ठानों में भी खरीद बिक्री नहीं हुई. दुकानदार ग्राहकों का आसरा देखते रहे. मगर बाजार में सन्नाटा पसरा रहा.
बच्चों को हुई परेशानी
शुक्रवार को सरकारी विद्यालयों में संत रविदास जयंती की छुट्टी होने के कारण बच्चों को ंजहां राहत रहीं वहीं निजी स्कूल के छात्र-छात्रओं को फजीहत का सामना करना पड़ा.
शहर के कई प्रतिष्ठित विद्यालयों ने वार्षिक परीक्षा शुरू कर दिया है, जिसके कारण बच्चों को बारिश में भींग कर पानी व कीचड़ से गुजर कर तथा ठंड का सामना करते हुए विद्यालय जाने पर मजबूरहोना पड़ा.
नारकीय हुआ शहर
असमय बारिश ने नगर परिषद के सफाई व नाला उड़ाही कार्य का पोल खोल दिया. हल्की बारिश ने ही शहर के मुख्य मार्गो व मुहल्ले की सड़कों को जलप्लावित कर दिया. करीमचक, आजाद रोड, साहेबगंज, गुदरी, भगवान बाजार, थाना रोड, राजेंद्र कालेज रोड, कटरा, दलदली बाजार, सरकारी बाजार, मौना, हुस्से छपरा, नबीगंज, अजयाबगंज, रूपगंज, आर्य नगर, शक्ती नगर आदि मुहल्लों की सड़कों में घुटने भर पानी लग गया. जहां पानी नहीं लगा वहां कीचड़ का साम्राज्य फैल गया. इस वजह से भी लोग घरों से बाहर निकलने से परहेज करते रहे.
