मधुबनी : रहिका थाना क्षेत्र के सौराठ पोखरौनी लचका पुल पर हुए 25 वर्ष पूर्व डकैती के एक मामले में प्रथम त्वरित न्यायालय के न्यायाधीश विनय कुमार सिंह के न्यायालय में सजा के बिन्दु पर शनिवार को सुनवाई हुई. न्यायालय ने दोनों पक्षों के दलिल सुनने के बाद दोषी आरोपी हरलाखी थाना क्षेत्र के दुर्गापट्टी […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
मधुबनी : रहिका थाना क्षेत्र के सौराठ पोखरौनी लचका पुल पर हुए 25 वर्ष पूर्व डकैती के एक मामले में प्रथम त्वरित न्यायालय के न्यायाधीश विनय कुमार सिंह के न्यायालय में सजा के बिन्दु पर शनिवार को सुनवाई हुई. न्यायालय ने दोनों पक्षों के दलिल सुनने के बाद दोषी आरोपी हरलाखी थाना क्षेत्र के दुर्गापट्टी निवासी मो़ हारूण ऊर्फ लाल बाबू एवं नगर थाना क्षेत्र के सूरतगंज निवासी सरोज कुमार साह ऊर्फ सरोज को दफा 395 भादवि में छह वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है.
साथ ही पांच हजार रुपया जुर्माना भी लगाया है. जुर्माने की राशि नहीं देने पर छह माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी. अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक मनोज तिवारी ने बहस करते हुये न्यायालय से कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग रखी. वहीं बचाव पक्ष से अधिवक्ता रमानंद झा एवं हरेकांत झा ने बहस किया था.
क्या था मामला : अभियोजन के अनुसार 11 अक्टूबर 1993 में सूचक रहिका थाना क्षेत्र के पोखरौनी निवासी गिरजानंद अपने घर पोखरौनी जा रहा था. इसी दौरान उक्त आरोपी ने अन्य लोगों के साथ सौराठ पोखरौनी के लचका पुल के पास सूचक को रिवाल्वर से भय दिखा कर एचएमटी की घड़ी, जेव से 75 रुपया सहित अन्य सामान छीन लिया था. साथ ही उक्त आरोपी बढ़ते हुये एक अन्य राहगीर घनश्याम मिश्र का भी एचएमटी काजल घड़ी सहित नगद छीन लिया था. इसी बावत सूचक गिरजानंद झा के बयान पर नगर थाना रहिका में प्राथमिकी दर्ज करायी गई थी.
अनुसंधान में आया था आरोपी का नाम
उक्त घटना को लेकर पुलिस द्वारा अज्ञात पर प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान प्रारंभ किया गया था. अनुसंधान के क्रम में उक्त दोनों आरोपी के साथ अभियुक्त को चिह्नित कर न्यायालय में आरोप पत्र जमा किया था.
सूचक ने दो आरोपी का किया था पहचान
अनुसंधान के क्रम में नो अभियुक्तों में पुलिस परेड के दौरान सूचक द्वारा अभियुक्त मो़ हारुण एवं सरोज कुमार साह को पहचान किया गया था.
सात हुए रिहा
उक्त कांड में विचारण के दौरान न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में सात आरोपी घनश्याम ठाकुर, रामप्रसाद ठाकुर, योगेन्द्र ठाकुर, घनश्याम महतो, चन्द्र किशोर प्रसाद, विनोद यादव एवं ललन ठाकुर को रिहा कर दिया.