बिजली दो, नहीं तो मिट जायेगी धरोहर

पटना: इनसान तो घंटे-दो घंटे बिजली संकट का सामना कर सकता है, लेकिन उन धरोहरों का क्या होगा, जिसे बिजली के भरोसे ही जिंदा रखा जाता है. ऐसा ही कुछ इन दिनों पटना म्यूजियम परिसर में हो रहा है. पिछले एक माह से म्यूजियम में बिजली की किल्लत हो रही है. इसकी वजह से उसमें […]

पटना: इनसान तो घंटे-दो घंटे बिजली संकट का सामना कर सकता है, लेकिन उन धरोहरों का क्या होगा, जिसे बिजली के भरोसे ही जिंदा रखा जाता है. ऐसा ही कुछ इन दिनों पटना म्यूजियम परिसर में हो रहा है. पिछले एक माह से म्यूजियम में बिजली की किल्लत हो रही है. इसकी वजह से उसमें रखे बेशकीमती सामान और पेंटिंग खराब होने लगे हैं. इसका आभास होते ही म्यूजियम प्रशासन ने फौरन पेसू को पत्र लिखा. लेकिन, पत्र लिखने के ग्यारह दिन बीत जाने के बाद भी पटना म्यूजियम में बिजली संकट जस-का-तस बना हुआ है.

तापमान में उतार-चढ़ाव से प्रॉब्लम : म्यूजियम प्रशासन ने पेसू को लिखे पत्र में कहा है कि अचानक से बिजली कट जाने के बाद जेनरेटर चलाया जाता है. इससे तापमान में उतार-चढ़ाव आ जाता है. इसका बुरा असर गैलरी में रखी धरोहरों पर होता है. जेनरेटर पर हर दिन 20 हजार रुपये का खर्च भी आता है. सूत्रों के अनुसार बिजली कट की प्रॉब्लम ङोल रहे म्यूजियम में 16 गैलरी में से नौ को 24 घंटे एसी की जरूरत है, जिसे म्यूजियम पूरा नहीं कर पा रहा है. फिलहाल हर दिन पटना म्यूजियम में तीन से चार घंटे बिजली कट जा रही है. बिजली जाने से उतनी दिक्कतें नहीं हैं, जितनी दिक्कतें तापमान के कम-अधिक होने से होती हैं. म्यूजियम सूत्रों के मुताबिक जिस गैलरी को एसी की आवश्यकता है, वहां पर टेंपरेचर में अधिक उतार-चढ़ाव नहीं होना चाहिए.

नहीं हो पा रहा सिक्का और मूर्ति का ट्रीटमेंट : बिजली की आंख मिचौनी और वोल्टेज के उतार-चढ़ाव का असर पटना म्यूजियम के ट्रीटमेंट और रिसर्च सेंटर पर भी पड़ने लगा है. ट्रीटमेंट प्लांट की हालत खराब हो चुकी है. कई दिनों से वहां पर सिक्के आदि का कोई ट्रीटमेंट नहीं किया गया है. विदित हो कि म्यूजियम में समय-समय पर सिक्के और मूर्तियों को मेंटेन किया जाता है. अधिक समय तक उन्हें रखने के लिए उनके ऊपर केमिकल्स से ट्रीटमेंट किया जाता है.

केमिकल्स को रखने के लिए बिजली की आवश्यकता होती है. लेकिन, वह भी काम इन दिनों ठप पड़ा हुआ है.

पांडुलिपियां भी हो रहीं खराब
यही नहीं म्यूजियम परिसर में पांडुलिपियां का भी ट्रीटमेंट किया जाता है. इसके अलावा राहुल सांकृत्यायन के द्वारा लायी गयीं पांडुलिपियों को सहेज कर रखने के लिए एक फ्रीज भी बिहार रिसर्च सोसाइटी में रखा हुआ है. इसमें पांडुलिपियों को रख कर कीड़ा लगने से बचाया जाता है. लेकिन बिजली नहीं रहने का असर फ्रीज पर भी पड़ा है.

नहीं लगा अब तक सेंट्रल एसी
पटना म्यूजियम की ओर से लगातार सेंट्रल एसी लगाने की मांग होती रही है, लेकिन अभी तक सेंट्रल एसी नहीं लगाया गया है. दिल्ली के नेशनल म्यूजियम की तरह अगर सेंट्रल एसी पटना म्यूजियम में हो, तो धरोहरों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी. चोरी होने के डर से म्यूजियम में खिड़की होते हुए भी उसे हमेशा बंद रखा जाता है.

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