Sunil Gavaskar Ravindra Jadeja no ball: भारत-श्रीलंका टेस्ट सीरीज में रवींद्र जडेजा की बार-बार नो-बॉल अब सिर्फ मैदान की गलती नहीं रह गई है. इस मामले पर भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने ऐसा सुझाव दिया है, जिस पर क्रिकेट फैंस के बीच चर्चा शुरू हो सकती है. गावस्कर का कहना है कि टेस्ट क्रिकेट में बार-बार नो-बॉल करने वाले गेंदबाजों पर आर्थिक जुर्माना बढ़ाते जाना चाहिए.
जडेजा की नो-बॉल पर गावस्कर क्यों हुए सख्त?
जडेजा ने श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों में कई बार गेंदबाजी क्रीज से आगे निकलकर नो-बॉल की. खास बात यह है कि 2021 से वह 85 से ज्यादा नो-बॉल कर चुके हैं. कोलंबो टेस्ट में डेब्यू करने वाले सरांश जैन भी फ्रंट फुट को लेकर संघर्ष करते नजर आए. गावस्कर के मुताबिक,
गेंदबाज के पास रन-अप नापने के लिए टेप मापने जैसी सुविधा मौजूद है, इसलिए बार-बार क्रीज से आगे निकलने की गलती को आसानी से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
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फ्री हिट पर गावस्कर ने क्या कहा?
भारत के स्पिन गेंदबाजी कोच सिराज बहुतुले ने मजाक में सुझाव दिया था कि नो-बॉल के बाद बल्लेबाज को फ्री हिट दी जा सकती है. लेकिन गावस्कर ने इस विचार को खारिज कर दिया. उनका मानना है कि
टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाजों के लिए रन बनाना पहले ही आसान हो रहा है. ऐसे में नो-बॉल के बाद फ्री हिट देना गेंदबाजों के लिए सजा के बजाय बल्लेबाजों को अतिरिक्त फायदा देने जैसा होगा.
हर नो-बॉल पर दोगुना होगा जुर्माना?
गावस्कर का सुझाव है कि
पहली नो-बॉल पर एक तय रकम का जुर्माना लगाया जाए. अगर गेंदबाज दोबारा वही गलती करता है तो जुर्माने की रकम दोगुनी कर दी जाए. यानी जितनी बार नो-बॉल, उतनी ही बड़ी जेब पर चोट.
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गेंदबाजी कोच से भी लिया जाए जुर्माना
गावस्कर ने जिम्मेदारी सिर्फ गेंदबाज तक सीमित नहीं रखी. उन्होंने कहा कि
गेंदबाजी कोच पर भी गेंदबाज के जुर्माने की आधी रकम लगाई जा सकती है. उनके मुताबिक, इससे गेंदबाजों के साथ कोच भी फ्रंट-फुट की गलती रोकने को गंभीरता से लेंगे.
टेस्ट सीरीज में क्या हुआ?
भारत ने श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज 1-0 से जीती. गाले में भारत ने पहला टेस्ट शानदार अंदाज में अपने नाम किया, जबकि कोलंबो टेस्ट ड्रॉ रहा. श्रीलंका ने पांचवें दिन सोनल दिनुषा के नाबाद 133 रन की बदौलत मैच बचाया. गावस्कर का यह सुझाव अब बहस छेड़ सकता है कि टेस्ट क्रिकेट में बार-बार नो-बॉल रोकने के लिए क्या मौजूदा नियम काफी हैं या गेंदबाजों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की जरूरत है.
