भारत ने 15 साल बाद जूनियर हॉकी का विश्व कप जीत लिया है. भारत ने यह गौरव मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में प्राप्त किया. भारत ने बेल्जियम को 2-1 से हराकर खिताब अपने नाम किया. भारतीय जूनियर टीम को यह खिताब दिलाने वाल हैं कोच हरेंद्र सिंह. जब टीम ने जीत दर्ज की तो हरेंद्र सिंह अपने आंसुओं पर काबू नहीं रख सके और फफक कर रो पड़े.
लक्ष्य को अर्जुन की तरह साधते हैं हरेंद्र सिंह, भारत को बनाया हॉकी का विश्व विजेता
भारत ने 15 साल बाद जूनियर हॉकी का विश्व कप जीत लिया है. भारत ने यह गौरव मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में प्राप्त किया. भारत ने बेल्जियम को 2-1 से हराकर खिताब अपने नाम किया. भारतीय जूनियर टीम को यह खिताब दिलाने वाल हैं कोच हरेंद्र सिंह. जब टीम ने जीत दर्ज की तो हरेंद्र […]

जिस लक्ष्य को साधने के लिए कोच बने उसे पूरा किया
कोच हरेंद्र सिंह वर्ष 2014 में जूनियर हॉकी टीम के कोच बने थे, उनके सामने लक्ष्य था वर्ष 2016 का विश्वकप जीतना. कहना ना होगा कि हरेंद्र सिंह ने इस लक्ष्य को पूरा किया. हरेंद्र सिंह ने अपने कोचिंग कैरियर की शुरुआत वर्ष 1998 में की थी. उनके पास 379 मैच में कोचिंग देने का अनुभव है. उनके पास वर्ष 2000 के सिडनी ओलंपिक, वर्ष 2005,2006 और 2010 के वर्ल्ड कप, 2006 और 2010 के एशियन गेम और 2004 और 2009 के एशिया कप में भी कोचिंग देने का अनुभव है. उन्होंने कोच रहते हुए सीनियर और जूनियर टीम को आठ गोल्ड मेडल दिलवाया है.
वर्ष 2005 में रॉटरडैम में जो सपना टूटा था, उसे पूरा किया
हरेंद्र सिंह जूनियर हॉकी विश्वकप 2005 में भी अपनी टीम को मेडल दिलाना चाहते थे, लेकिन उनका सपना तब टूट गया था जब हालैंड ने पेनाल्टी शूटआउट में भारत को हरा दिया था. वे उस वक्त बहुत भावुक थे, गुस्सा और निराशा उनके चेहरे पर उभर आये थे. लेकिन विश्व कप 2016 का खिताब जीतने के बाद उनका सपना पूरा हो गया.