नयी दिल्ली : बैडमिंटन में भारत की चोटी की युगल खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा ने लक्ष्य ओलंपिक पोडियम (टॉप) कार्यक्रम के लिये उन्हें नजरअंदाज करने पर आज खेल मंत्रालय की आलोचना की और कहा कि देश का मान सम्मान बढाने के लिये इतनी कडी मेहनत करने के बाद वह सरकार से इस तरह के व्यवहार की हकदार नहीं थी.
अश्विनी पोनप्पा के साथ मिलकर विश्व चैंपियनशिप 2011 में कांस्य पदक जीतने वाली ज्वाला ने कहा कि शीर्ष शटलर होने के बावजूद कार्यक्रम में जगह नहीं बनाने पर उन्हें निराशा हुई. ज्वाला ने कहा, मैंने अभी खबर पढी कि अश्विनी और मेरा नाम टॉप कार्यक्रम में शामिल नहीं है. हमें केवल भारत सरकार से सहयोग मिल रहा था और अब इसकी संभावना भी क्षीण पड गयी है.
जिन खिलाडियों को पहले ही कॉरपोरेट जगत से सहयोग मिल रहा है वे इस सूची में है लेकिन मेरे और अश्विनी के नाम पर विचार नहीं किया गया. मैं नहीं जानती कि इससे ज्यादा और क्या करना है. मैं दुखी और निराश हूं. उन्होंने कहा, यदि हम बोलते हैं तो इसे विरोध माना जाएगा और यदि नहीं बोलते हैं तो हमें बाहर कर दिया जाएगा. हमने केवल युगल में खेलने के लिये काफी संघर्ष किया है. हमने ऐसा प्रदर्शन किया जिसकी उम्मीद तक नहीं जा रही थी लेकिन संघ ने हमें लगातार हतोत्साहित किया और अब सरकार भी ऐसा कर रही है. हम खुद को कैसे प्रेरित कर सकते हैं.
टॉप कार्यक्रम में कुछ खेलों के उन खिलाडियों को रखा गया है जिनसे ओलंपिक में पदक की संभावना हो. उन्हें शीर्ष स्तर के प्रशिक्षण के लिये धन मुहैया कराया जाएगा. सूत्रों के अनुसार बैडमिंटन से साइना नेहवाल, किदाम्बी श्रीकांत, पारुपल्ली कश्यप, एच एस प्रणय, आरएमवी गुरुसाईदत्त और पी वी सिंधु को इस कार्यक्रम के लिये चुना गया है.
विश्व में अभी 19वें नंबर की जोडी ज्वाला और अश्विनी ने भी टॉप कार्यक्रम में शामिल करने के लिये सरकार को लिखा था. ज्वाला ने कहा, यदि आप प्रदर्शन की बात करो तो हम अभी विश्व में 19वें नंबर पर है. हमने पिछले साल तीन पदक जीते थे. अब हमारा लक्ष्य ओलंपिक के लिये क्वालीफाई करना है और मैं जानती हूं कि कई लोगों को यह पता नहीं है कि युगल में यह कितना मुश्किल होता है.
उन्होंने कहा, हमें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है और यदि हम इस बात करते हैं तो लोग बोलते हैं तो हम इतना विरोध क्यों करते हैं. हमारे माता पिता और प्रशिक्षकों ने बलिदान दिया है. वे चाहते हैं कि हम अच्छा प्रदर्शन करें लेकिन हमारे संघ और मुख्य राष्ट्रीय कोच ने हमें लगातार नीचा दिखाया.
