भारोत्तोलन के लिये बेदाग रहा साल 2017, चानू ने जोड़ा सफलता का नया अध्याय
नयी दिल्ली : पिछले चार साल में 45 डोप टेस्ट झेल चुकी मीराबाई चानू ने वर्ष 2017 में सफलता का नया अध्याय जोड़ा जबकि अतीत में डोप विवादों के कारण विश्वसनीयता खो चुके भारतीय भारोत्तोलन के लिये बीता साल बेदाग रहा. मणिपुर की 23 बरस की चानू ने पिछले दो दशक में देश को विश्व […]
नयी दिल्ली : पिछले चार साल में 45 डोप टेस्ट झेल चुकी मीराबाई चानू ने वर्ष 2017 में सफलता का नया अध्याय जोड़ा जबकि अतीत में डोप विवादों के कारण विश्वसनीयता खो चुके भारतीय भारोत्तोलन के लिये बीता साल बेदाग रहा. मणिपुर की 23 बरस की चानू ने पिछले दो दशक में देश को विश्व चैम्पियनशिप में पहला स्वर्ण पदक दिलाया. चानू ने 30 नवंबर को अमेरिका के अनाहेम में विश्व चैम्पियनशिप में महिलाओं के 48 किलो वर्ग में स्वर्ण जीता. वह कर्णम मल्लेश्वरी के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय भारोत्तोलक बनी. मल्लेश्वरी ने 1994 और 1995 में पीला तमगा जीता था.
चानू को भी विश्व चैम्पियनशिप से लौटने के बाद दो दिन के भीतर दो डोप टेस्ट से गुजरना पड़ा. चानू की पिछले साल रियो ओलंपिक की कड़वी यादों को हालांकि विश्व चैम्पियनशिप के इस पदक ने मिटा दिया होगा. उसने 194 किलो का अपना राष्ट्रीय रिकार्ड बेहतर किया और आगे उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद बंधी है.
मौजूदा राष्ट्रमंडल चैम्पियन चानू की स्वर्ण पदक की राह हालांकि आसान नहीं थी. एक साल पहले ही रियो ओलंपिक में पदक नहीं जीत पाने के कारण आलोचना झेलने वाली चानू को खेल को अलविदा कहने का मन बना लिया था. उसने उस निराशा से उबरते हुए नये सिरे से शुरुआत की और आखिर उसकी मेहनत रंग लायी.
रियो में नाकामी के बाद घंटों कड़ा अभ्यास करने वाली चानू अपनी बहन की शादी में भी नहीं जा सकी थी चूंकि उसी दौरान उसे एक चैम्पियनशिप खेलनी थी. इतनी कुर्बानियों के बाद पदक मिलने पर आंसू छलकना स्वाभाविक था. यह उस तनाव की सुखद परिणिति थी जो 20 दिन में चार और कैरियर में वाडा और नाडा के 45 डोप टेस्ट झेलने के कारण उसे मिला.
चानू ने कहा, पिछले दो साल में मैने इतने टेस्ट दिये लेकिन कभी कुछ नहीं निकला. मुझसे जब भी नमूने मांगे गए, मैंने दिये. मेरे पास छिपाने के लिये कुछ नहीं है. मेरी चिंता सिर्फ प्रशिक्षण और अगले साल राष्ट्रमंडल तथा एशियाई खेलों में अच्छा प्रदर्शन है. भारत विश्व डोपिंग निरोधक एजेंसी की वैश्विक डोपिंग उल्लंघन रिपोर्ट में लगातार तीसरे साल तीसरे स्थान पर रहा. इस दौरान 117 खिलाड़ी प्रतिबंधित दवाओं के सेवन के दोषी पाये गए और सबसे ज्यादा 56 भारोत्तोलक थे. पिछला साल भले ही इस खेल में चानू की उपलब्धि के नाम रहा हो लेकिन 16 भारतीय भारोत्तोलकों ने ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में होने वाले 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में जगह बनाई.