Mohammed Siraj Success Story: मोहम्मद सिराज की कहानी सिर्फ एक क्रिकेटर के कामयाब होने की कहानी नहीं है. यह उस लड़के की कहानी है, जिसने आर्थिक तंगी, संसाधनों की कमी और निजी जिंदगी के बेहद कठिन दौर के बावजूद अपने सपने को मरने नहीं दिया. कभी मैदान पर चप्पल पहनकर गेंदबाजी करने वाले सिराज आज भारतीय क्रिकेट के प्रमुख तेज गेंदबाजों में गिने जाते हैं.
उनकी जिंदगी में एक दौर ऐसा भी था जब परिवार की आर्थिक मदद के लिए उन्हें कैटरिंग का काम करना पड़ा और शादी समारोहों में रूमाली रोटी तक बनानी पड़ी. सिराज ने खुद अपने शुरुआती संघर्षों को याद करते हुए बताया था कि वह इस काम से मिलने वाले 100-200 रुपये में से भी कुछ पैसा घर पर देते थे.
धीमी पिच पर पेसरों की चुनौती
श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में भारतीय तेज गेंदबाजों के सामने बड़ी चुनौती होगी. स्पिनरों के अनुकूल धीमी पिचों पर स्विंग और गति से विकेट निकालना आसान नहीं होगा. तेज गेंदबाजी आक्रमण की अगुआई मोहम्मद सिराज करेंगे. जसप्रीत बुमराह की फिटनेस को लेकर बनी स्थिति में सिराज पर नई गेंद से शुरुआती सफलता दिलाने के साथ-साथ लंबे और आक्रामक स्पेल करने की भी बड़ी जिम्मेदारी होगी. दूसरे तेज गेंदबाज के रूप में प्रसिद्ध कृष्णा को मौका मिलता है या गुरनूर बराड़ और आकिब नबी में से किसी को टेस्ट डेब्यू कराया जाता है, यह देखने वाली बात होगी.
लंबे स्पेल सिराज की सबसे बड़ी ताकत
सिराज की पहचान सिर्फ तेज गेंदबाजी और दोनों तरफ गेंद स्विंग कराने की क्षमता तक सीमित नहीं है. लगातार लंबे समय तक प्रभावी गेंदबाजी करना उनकी सबसे बड़ी खूबियों में शामिल है. इंग्लैंड के खिलाफ हालिया पांच टेस्ट की सीरीज में उन्होंने 185.3 ओवर गेंदबाजी की और इसके बावजूद आखिरी टेस्ट तक अपनी धार बनाए रखी. यह उनकी शानदार फिटनेस के साथ-साथ मानसिक मजबूती का भी उदाहरण है. श्रीलंका की परिस्थितियों में भारत को सिराज से इसी तरह के धैर्य और निरंतरता की उम्मीद होगी.
विदेश में रहा है सिराज का दबदबा
विदेशी परिस्थितियां सिराज के लिए हमेशा अनुकूल रही हैं. उन्होंने अब तक टेस्ट क्रिकेट में 140 विकेट लिए हैं, जिनमें सिर्फ 36 विकेट भारतीय जमीन पर आए हैं. यानी उनके कुल विकेटों का 74.29 प्रतिशत हिस्सा विदेश में आया है. विदेशों में इंग्लैंड उनके लिए सबसे सफल देश रहा है, जहां उन्होंने 46 विकेट चटकाए हैं. श्रीलंका की धीमी पिचों पर भी यदि सिराज नई गेंद से शुरुआती मदद हासिल करने में सफल रहते हैं, तो वह भारतीय आक्रमण के लिए अहम हथियार साबित हो सकते हैं.
बल्ले से भी दे सकते हैं योगदान
श्रीलंका एकादश के खिलाफ अभ्यास मैच में सिराज ने तेजतर्रार बल्लेबाजी कर निचले क्रम में रन बनाने की अपनी क्षमता भी दिखाई. टेस्ट में जरूरत पड़ने पर उनके कुछ उपयोगी रन भारत के लिए अहम साबित हो सकते हैं. गेंद और बल्ले, दोनों से योगदान देने की यह क्षमता उन्हें टीम के लिए और महत्वपूर्ण बनाती है.
किराए के घर में बीता बचपन
मोहम्मद सिराज का जन्म 13 मार्च 1994 को हैदराबाद में हुआ. उनके पिता मोहम्मद गौस ऑटो-रिक्शा चलाकर परिवार का खर्च उठाते थे. क्रिकेट के प्रति सिराज की दिलचस्पी बचपन से थी, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि उनके क्रिकेट के शौक पर आसानी से पैसा खर्च किया जा सके.
उपलब्ध प्रोफाइल और सिराज के अपने बयानों के मुताबिक उन्होंने शुरुआती दौर में टेनिस बॉल से क्रिकेट खेलना शुरू किया और क्लब क्रिकेट तक पहुंचने में भी उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा. सिराज के लिए क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं था, बल्कि आगे बढ़ने का सपना था. उनके पास महंगे क्रिकेट उपकरण नहीं थे. यहां तक कि 19 साल की उम्र तक वह क्रिकेट खेलने के लिए चप्पलों में उतरते रहे। बाद में जब उन्हें सही क्रिकेट किट और जूते मिले तो उनके खेल को नई दिशा मिली.
रूमाली रोटी सेंककर जुटाते थे क्रिकेट का खर्च
सिराज ने 2024 में अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया था कि वह परिवार की मदद के लिए कैटरिंग का काम करते थे. शादी और दूसरे समारोहों में काम करते हुए उन्हें कभी-कभी सिर्फ 100 या 200 रुपये मिलते थे. वह उसमें से कुछ पैसा घर देते और बाकी अपने पास रखते थे.
उन्होंने यह भी बताया था कि रूमाली रोटी बनाते समय उनके हाथ तक जल जाते थे, लेकिन उन्हें इस बात का मलाल नहीं था क्योंकि यही संघर्ष उन्हें आगे लेकर आया. यही वह दौर था जब सिराज ने यह तय किया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी मुश्किल क्यों न हों, क्रिकेट नहीं छोड़ना है. उन्होंने हैदराबाद की गलियों और स्थानीय क्रिकेट से अपनी पहचान बनानी शुरू की.
टेनिस बॉल से शुरू हुआ सफर
सिराज ने शुरुआती दिनों में टेनिस बॉल क्रिकेट खेला. इसी दौरान उनकी तेज गेंदबाजी की क्षमता सामने आई. 19 साल की उम्र के आसपास उन्होंने क्लब क्रिकेट में गंभीरता से कदम रखा. एक शुरुआती मुकाबले में उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए नौ विकेट हासिल किए थे. यही प्रदर्शन उनके लिए बड़ा टर्निंग प्वाइंट बना. इसके बाद सिराज ने लेदर बॉल से क्रिकेट की दुनिया में कदम रखा और धीरे-धीरे हैदराबाद की घरेलू टीम तक पहुंचे. 2015-16 रणजी ट्रॉफी में उनका फर्स्ट-क्लास डेब्यू हुआ. इसके बाद 2016-17 रणजी सीजन उनके करियर का निर्णायक मोड़ साबित हुआ. उस अभियान में उन्होंने 41 विकेट लेकर अपनी तेज गेंदबाजी का दम दिखाया और हैदराबाद के सबसे प्रभावी गेंदबाजों में शामिल हो गए.
आईपीएल ने खोला दरवाजा
रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन के बाद सिराज की नजर आईपीएल और राष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट पर गई. 2017 में सनराइजर्स हैदराबाद ने उन्हें 2.6 करोड़ रुपये में खरीदा. एक ऐसे खिलाड़ी के लिए यह बड़ी छलांग थी, जो कुछ साल पहले तक क्रिकेट का खर्च निकालने के लिए छोटे-मोटे काम कर रहा था. आईपीएल ने सिराज को बड़े मंच पर खुद को साबित करने का मौका दिया. हालांकि शुरुआती वर्षों में उन्हें उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा. खास तौर पर 2019 का आईपीएल सीजन उनके लिए कठिन रहा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. लगातार मेहनत, अपनी लाइन-लेंथ में सुधार और तेज गेंदबाजी पर भरोसा बनाए रखने का फायदा उन्हें आगे मिला.
टीम इंडिया तक पहुंचने का सपना हुआ पूरा
घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में प्रदर्शन के बाद सिराज ने भारतीय टीम का दरवाजा खटखटाया. वह धीरे-धीरे भारत के तीनों फॉर्मेट (टेस्ट, वनडे और टी20) में अपनी जगह बनाने में सफल रहे. उनकी गेंदबाजी की सबसे बड़ी ताकत उनकी रफ्तार के साथ आक्रामकता, सीम मूवमेंट और सटीक लाइन-लेंथ रही है. नई गेंद से विकेट निकालने के साथ-साथ वह पारी के आखिरी हिस्से में यॉर्कर और तेज गेंदों से बल्लेबाजों को परेशान करने की क्षमता भी रखते हैं.
पिता के निधन का सदमा
सिराज के करियर का सबसे भावुक अध्याय ऑस्ट्रेलिया दौरे पर लिखा गया. 2020-21 के दौरे के दौरान उनके पिता मोहम्मद गौस का निधन हो गया. सिराज उस समय ऑस्ट्रेलिया में भारतीय टीम के साथ थे. बीसीसीआई ने उन्हें स्वदेश लौटने का विकल्प दिया था, लेकिन सिराज ने टीम के साथ रहने और अपने पिता का सपना पूरा करने का फैसला किया. टेस्ट सीरीज में सिराज ने जबरदस्त प्रदर्शन किया.
उन्होंने तीन टेस्ट मैचों में 13 विकेट लिए और भारत की ऐतिहासिक 2-1 सीरीज जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. गाबा टेस्ट में उन्होंने पहली बार टेस्ट क्रिकेट में पांच विकेट लेने का कारनामा किया. उस प्रदर्शन के बाद उन्होंने अपने सभी विकेट अपने पिता को समर्पित किए. गाबा की जीत सिर्फ भारतीय क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक नहीं थी, बल्कि सिराज के व्यक्तिगत जीवन की सबसे भावुक जीतों में से एक थी. उनके पिता का सपना था कि बेटा भारत के लिए खेले और दुनिया उसे देखे। सिराज ने ऑस्ट्रेलिया में उसी सपने को पूरा किया.
आईपीएल में करोड़ों का दांव
सिराज की लगातार बढ़ती कीमत और बाजार में उनकी मांग का अंदाजा आईपीएल 2025 की मेगा नीलामी से लगाया जा सकता है. गुजरात टाइटंस ने उन्हें 12.25 करोड़ रुपये की बड़ी रकम में खरीदा. आधिकारिक आईपीएल नीलामी रिकॉर्ड में भी सिराज की जीतने वाली बोली 12.25 करोड़ रुपये दर्ज है. गुजरात टाइटंस ने भी अपने आधिकारिक ऑक्शन अपडेट में सिराज को 12.25 करोड़ रुपये में टीम में शामिल किए जाने की पुष्टि की थी. यह रकम इस बात का संकेत है कि कभी क्रिकेट के जूतों के लिए संघर्ष करने वाला सिराज अब दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग में करोड़ों की कीमत वाला खिलाड़ी बन चुका है.
आईपीएल कमाई और नेटवर्थ को लेकर क्या है तस्वीर?
सिराज की कुल संपत्ति को लेकर अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में अलग-अलग अनुमान सामने आते हैं. 2025 की कुछ रिपोर्टों ने उनकी नेटवर्थ करीब 57 करोड़ रुपये से अधिक बताई थी. इन्हीं रिपोर्टों में हैदराबाद में उनकी करीब 13 करोड़ रुपये की संपत्ति का भी उल्लेख किया गया है. हालांकि, नेटवर्थ और व्यक्तिगत संपत्तियों के ये आंकड़े आधिकारिक रूप से ऑडिट किए गए आंकड़े नहीं हैं, इसलिए इन्हें अनुमान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए. यह जरूर साफ है कि सिराज की आय के प्रमुख स्रोतों में आईपीएल अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट), बीसीसीआई की मैच फीस और केंद्रीय कॉन्ट्रैक्ट के साथ ब्रांड एंडोर्समेंट शामिल हैं.
बीसीसीआई ग्रेड-बी में शामिल
सिराज की मौजूदा स्थिति का एक महत्वपूर्ण संकेत बीसीसीआई का 2025-26 केंद्रीय अनुबंध है. बीसीसीआई की आधिकारिक सूची के मुताबिक मोहम्मद सिराज को ग्रेड-B में रखा गया है. इस श्रेणी में उनका नाम वॉशिंगटन सुंदर, रोहित शर्मा, विराट कोहली और केएल राहुल जैसे खिलाड़ियों के साथ दर्ज है. ग्रेड-B के लिए निर्धारित रिटेनर राशि के आधार पर सिराज को सालाना 3 करोड़ रुपये मिलते हैं. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मैचों की फीस और अन्य क्रिकेट संबंधी आय उनकी कुल कमाई को और बढ़ाती है.
बने तेलंगाना पुलिस में डीएसपी
सिराज की उपलब्धियों को सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं रखा गया. टी20 विश्व कप जीत के बाद तेलंगाना सरकार ने उन्हें पुलिस विभाग में मानद डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) की जिम्मेदारी दी. यह उनके लिए एक अलग तरह का सम्मान था कि जिसमें खेल उपलब्धि के साथ राज्य के गौरव का भी जुड़ाव था। हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात स्पष्ट करना जरूरी है कि डीएसपी पद से मिलने वाली सैलरी को लेकर कई मीडिया रिपोर्टों में अलग-अलग दावे किए गए हैं, लेकिन इसे सिराज की कुल निजी आय में जोड़कर कोई निश्चित रकम बताना उचित नहीं होगा, जब तक आधिकारिक वेतन विवरण उपलब्ध न हो.
किराए के घर से आलीशान जिंदगी तक
सिराज की कहानी का सबसे भावुक पहलू यही है कि जिस परिवार को कभी किराए के घर में रहकर रोजमर्रा की जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ा, उसी परिवार का बेटा आज देश के सबसे चर्चित क्रिकेटरों में शामिल है. कभी पिता ऑटो चलाकर घर चलाते थे. बेटा क्रिकेट खेलने के लिए चप्पल पहनता था.
क्रिकेट का खर्च निकालने के लिए कैटरिंग करता था. कुछ सौ रुपये की कमाई में घर और अपने सपने दोनों संभालता था. फिर वही लड़का रणजी ट्रॉफी में 41 विकेट लेता है, आईपीएल में करोड़ों का खिलाड़ी बनता है, भारत के लिए टेस्ट मैचों में पांच विकेट लेता है और ऑस्ट्रेलिया में अपने पिता के सपने को पूरा करता है. आज सिराज की जिंदगी में आर्थिक सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय पहचान और प्रतिष्ठा है, लेकिन उनकी कहानी की असली ताकत करोड़ों रुपये नहीं, बल्कि वह संघर्ष है जिसने उन्हें यहां तक पहुंचाया.
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