हर मैच से पहले कार्टून देखते हैं वैभव सूर्यवंशी, कहा- सब के प्लान ई बा कि अच्छा करेके बा…

LSG v RR : राजस्थान रॉयल्स के खतरनाक बच्चा के नाम से प्रसिद्ध वैभव सूर्यवंशी ने अपना एक राज जाहिर किया है. उन्होंने बताया है कि किसी भी मैच से पहले उनके दिमाग में कुछ नहीं चलता है और वे हर मैच से पहले कार्टून देखते हैं.

LSG v RR : लखनऊ सुपर जायंट्स को हराकर राजस्थान रॉयल्स की टीम बहुत खुश है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि अब टीम का प्ले ऑफ में जाना लगभग तय हो गया है. मैच से पहले टीम के सबसे युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी ने बताया कि वे हर मैच से पहले कार्टून शो देखते हैं, क्योंकि उन्हें इसकी आदत है. राजस्थान रॉयल्स के इंस्टाग्राम हैंडल से एक बहुत ही रोचक वीडियो पोस्ट किया गया है, जिसमें वैभव सूर्यवंशी भोजपुरी बोलते नजर आ रहे हैं.

मैं हर मैच से पहले कार्टून देखता हूं : वैभव सूर्यवंशी

वैभव सूर्यवंशी से भोजपुरी कमेंटेटर यह पूछते हैं कि जिस उम्र में लोग कार्टून देखते हैं, उस उम्र में आप गेंदबाजों के गेंद का कार्टून बना रहे हैं, आपके दिमाग में क्या चलता है. इस सवाल के जवाब में वैभव कहते हैं कि दिमाग में कुछ नहीं चलता है. आज भी मैच से पहले हम कार्टून देखते हैं, क्योंकि आदत है, लेकिन फोकस गेम पर होता है.

प्ले ऑफ में पहुंचना यही सबका टारगेट है

वैभव सूर्यवंशी ने कहा कि पूरी टीम की यही योजना है कि हम अगला मैच जीते और दो प्वाइंट लेकर प्ले ऑफ की तरफ बढ़ें. हालांकि लखनऊ के साथ मैच में वैभव का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा, लेकिन टीम एफर्ट से राजस्थान की टीम जीत गई. राजस्थान की टीम अब प्वाइंट टेबल में नंबर दो पर आ गई है और उसके 10 प्वाइंट हो गए हैं.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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