Jonty Sidhu illegal bat controversy: दिल्ली प्रीमियर लीग टी20 (Delhi Premier League t20) के दौरान मैदान पर एक ऐसा दिलचस्प और हैरान करने वाला मामला सामने आया, जिसने क्रिकेट प्रेमियों और विशेषज्ञों का ध्यान खींच लिया है. बल्लेबाजी करने उतरे जोंटी सिद्धू (Jonty Sidhu) के बल्ले को लेकर मैदान पर जो कुछ हुआ, उसने खेल के नियमों और अम्पायरिंग के तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
क्या है पूरा मामला?
घटना के दौरान जोंटी सिद्धू बल्लेबाजी करने के लिए क्रीज पर आए. क्रिकेट के अनिवार्य नियमों के तहत, मैदानी अम्पायर ने 'बैट गेज' (Bat Gauge) का उपयोग करके उनके बल्ले की जांच की.
- पहला टेस्ट: जांच के दौरान जोंटी सिद्धू का बल्ला निर्धारित रिंग (Gauge) से पास नहीं हो सका.
- अवैध करार: माप में विफल होने के कारण अम्पायर ने उस बल्ले को तुरंत अवैध (Illegal) घोषित कर दिया.
- साथी के बल्ले से छेड़छाड़: नियमों के तहत खिलाड़ी को दूसरा वैध बल्ला लेना चाहिए था, लेकिन सिद्धू ने अपने साथी खिलाड़ी का बल्ला लिया और उससे अपने बल्ले को ठोकना/पीटना (Knocking/Tapping) शुरू कर दिया.
- दोबारा जांच: इसके बाद बल्ले की फिर से गेज से जांच की गई. इस बार बल्ला गेज से आसानी से गुजर गया, जिसके बाद अंपायर ने उन्हें उसी बल्ले से खेलने की अनुमति दे दी.
नियमों के अनुसार क्या है प्रक्रिया?
क्रिकेट के नियमों (विशेष तौर पर लॉ 5 - बल्ला) के मुताबिक, बल्ले की साइज और उसकी चौड़ाई-मोटाई के कड़े मानक तय किए गए हैं:
- अम्पायर द्वारा उपयोग किया जाने वाला बैट गेज यह सुनिश्चित करने के लिए होता है कि बल्ले का आकार अनुमत सीमाओं के भीतर हो.
- नियम स्पष्ट कहते हैं कि बल्ले को आधिकारिक बैट गेज से वैसे ही पास होना चाहिए जैसा उसे मैदान पर पेश किया जाता है.
- यदि कोई बल्ला पहली बार में गेज टेस्ट में फेल हो जाता है, तो उसे तुरंत अवैध मान लिया जाता है और उसे बदला जाना अनिवार्य होता है. खिलाड़ी को एक अलग और पूरी तरह से नियम-सम्मत (Compliant) बल्ले का उपयोग करना होता है.
क्या बीच मैदान पर ऐसा करना कानूनी है?
क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि जोंटी सिद्धू ने मैदान पर अपने बल्ले को हथौड़े या दूसरे बल्ले से मारकर उसका आकार बदल दिया और फिर उसे दोबारा जांच में पास करवा लिया. यह क्रिकेट के नियमों की भावना के खिलाफ माना जा सकता है. अगर कोई बल्ला पहली जांच में तय मानकों पर खरा नहीं उतरता, तो उसे मौके पर ही बदलकर सही मान लेना जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है. इस घटना के बाद घरेलू क्रिकेट और टी20 लीगों में बल्लों की जांच और अंपायरों के नियमों को लेकर फिर से चर्चा शुरू हो गई है.
