श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए जसप्रीत बुमराह की जगह आकिब नबी को शामिल किया गया है. यह सीरीज 15 अगस्त से शुरू होगा. इस सीरीज में नबी के पास टेस्ट डेब्यू का शानदार मौका होगा. आकिब नबी को लेकर भारत के पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान का मानना है कि उनकी ताकत रफ्तार नहीं, बल्कि बल्लेबाजों को रक्षात्मक खेल खेलने पर मजबूर कर उन्हें आउट करने की क्षमता है.
2018 में ही पहचान ली थी प्रतिभा
इरफान पठान ने 2018 में श्रीनगर में हुए ट्रायल के दौरान पहली बार आकिब नबी की प्रतिभा को पहचाना था. इसके बाद उन्होंने जम्मू-कश्मीर के युवा खिलाड़ियों का मार्गदर्शन भी किया. पठान का मानना है कि नबी की स्वाभाविक गेंदबाजी, मजबूत कलाई की स्थिति और गेंद को देर से स्विंग कराने की क्षमता उन्हें खास बनाती है.
'पीटीआई' से बातचीत में पठान ने कहा, "गेंद को स्विंग कराने के लिए लगभग 135 किमी प्रति घंटे की रफ्तार आदर्श होती है. अगर आप गेंद को देर से स्विंग करा सकते हैं तो आप सफल हो सकते हैं. उसकी लय और गेंदबाजी एक्शन को देखकर मुझे लगता है कि वह लगातार 133-135 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी कर सकता है."
'बल्लेबाज को डिफेंस में फंसाना है असली कला'
इरफान पठान के अनुसार, तेज गति ही किसी तेज गेंदबाज की पहचान नहीं होती. असली चुनौती यह है कि वह विश्वस्तरीय बल्लेबाजों को रक्षात्मक शॉट खेलने के लिए मजबूर करे और फिर उन्हें आउट करने का रास्ता निकाले.
उन्होंने कहा, "क्या गेंदबाज में यह क्षमता है कि वह शीर्ष स्तर के बल्लेबाजों को डिफेंस करते हुए भी आउट कर सके? यही सबसे बड़ी खूबी होती है."
रणजी ट्रॉफी फाइनल का दिया उदाहरण
पठान ने इस साल के रणजी ट्रॉफी फाइनल का जिक्र करते हुए कहा कि आकिब नबी ने कर्नाटक के खिलाफ शानदार गेंदबाजी की थी. हालांकि उन्हें लोकेश राहुल का विकेट नहीं मिला, लेकिन उन्होंने उन्हें लगातार रक्षात्मक बल्लेबाजी करने पर मजबूर किया और दबाव बनाया.
उन्होंने कहा कि रणजी ट्रॉफी फाइनल में हमने देखा कि उसने लोकेश राहुल जैसे अनुभवी बल्लेबाज को काफी परेशान किया. भले ही विकेट नहीं मिला, लेकिन उसने उन्हें सामान्य अंदाज में डिफेंस करने पर मजबूर किया और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है. अब श्रीलंका दौरे पर आकिब नबी के पास अपनी इस क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साबित करने का सुनहरा अवसर होगा.
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