Falklands war: फीफा लंबे समय से दोनों देशों के बीच चले आ रहे फॉकलैंड द्वीप (अर्जेंटीना में जिसे इस्लास माल्विनास कहा जाता है) विवाद को देखते हुए रेफरी नियुक्ति में विशेष सावधानी बरतता है. यही वजह है कि पूरे टूर्नामेंट के दौरान भी किसी अंग्रेज रेफरी को अर्जेंटीना के मैचों में और किसी अर्जेंटीनी रेफरी को इंग्लैंड के मुकाबलों में जिम्मेदारी नहीं दी गई.
क्या है फॉकलैंड द्वीप विवाद?
फॉकलैंड द्वीप दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित एक छोटा सा द्वीप समूह है, जिस पर ब्रिटेन का शासन है, लेकिन अर्जेंटीना भी इन द्वीपों पर अपना हक जताता है. यह विवाद 1982 में तब हिंसक हो गया जब अर्जेंटीना ने इन पर सैन्य कब्जा कर लिया, जिसके जवाब में ब्रिटेन ने युद्ध छेड़ दिया. यह लड़ाई 74 दिनों तक चली, जिसमें सैकड़ों सैनिकों और कुछ स्थानीय निवासियों की जान गई, और अंत में जून 1982 में ब्रिटेन ने दोबारा नियंत्रण हासिल कर लिया. हालांकि युद्ध समाप्त हो चुका है, लेकिन अर्जेंटीना आज भी इन द्वीपों को अपना मानता है, जिससे यह मुद्दा आज भी दोनों देशों के बीच काफी संवेदनशील और अनसुलझा बना हुआ है.
रेफरी की नियुक्ति पर फीफा के सख्त नियम
फीफा का मानना है कि रेफरी की निष्पक्षता पर किसी भी तरह का संदेह नहीं होना चाहिए. इसलिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील देशों के बीच मुकाबलों में ऐसे देशों के रेफरी नियुक्त नहीं किए जाते, जिनकी किसी एक पक्ष से ऐतिहासिक या राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता रही हो. इसी नीति के तहत इंग्लैंड के रेफरी पूरे विश्व कप में अर्जेंटीना के किसी भी ग्रुप या नॉकआउट मुकाबले में नहीं दिखे. वहीं अर्जेंटीना के रेफरी भी इंग्लैंड के मैचों से पूरी तरह दूर रखे गए.
कौन-कौन से रेफरी हुए प्रभावित?
इंग्लैंड के अनुभवी रेफरी माइकल ओलिवर और एंथनी टेलर को अर्जेंटीना के स्विट्जरलैंड के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबले के लिए चयनित नहीं किया गया, जिसे लियोनेल मेसी की अगुआई वाली अर्जेंटीना ने 3-1 से जीत लिया. दूसरी ओर अर्जेंटीना के रेफरी फाकुंडो टेलो को भी टूर्नामेंट के केवल दूसरी ओर के मुकाबलों में नियुक्त किया गया, ताकि वह इंग्लैंड के किसी मैच में ऑफिशिएट न करें.
कैसे तय होते हैं विश्व कप के रेफरी?
विश्व कप में रेफरी नियुक्ति की जिम्मेदारी FIFA के रेफरी विभाग की होती है, जिसकी अगुवाई महान पूर्व रेफरी पियरलुइजी कोलिना कर रहे हैं. रेफरी चयन में पूरे टूर्नामेंट के दौरान उनके प्रदर्शन, फिटनेस, फैसलों की गुणवत्ता और अनुशासन को सबसे बड़ा आधार माना जाता है. हालांकि, इसके साथ-साथ भू-राजनीतिक परिस्थितियों और संभावित हितों के टकराव (Conflict of Interest) को भी ध्यान में रखा जाता है, ताकि किसी भी प्रकार के पक्षपात की आशंका न रहे.
अन्य देशों पर भी लागू है नियम
FIFA केवल इंग्लैंड और अर्जेंटीना के मामले में ही नहीं, बल्कि अन्य राजनीतिक रूप से संवेदनशील देशों के बीच भी इसी तरह की सावधानी बरतता है. इसके अलावा कोई भी रेफरी अपने ही देश के मैच में नियुक्त नहीं किया जाता. कई मामलों में उन क्लबों या क्षेत्रों से जुड़े मुकाबलों में भी रेफरी की नियुक्ति से बचा जाता है, जहां उनके व्यक्तिगत या क्षेत्रीय संबंध निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकते हैं.
सेमीफाइनल में भी नहीं होंगे दोनों देशों के रेफरी
बुधवार को होने वाले इंग्लैंड और अर्जेंटीना के सेमीफाइनल मुकाबले में भी दोनों देशों का कोई रेफरी मैदान पर नहीं होगा. ऐसे में इंग्लैंड और अर्जेंटीना के रेफरी केवल दूसरे सेमीफाइनल यानी कि स्पेन और फ्रांस में ही नियुक्त किए जा सकते हैं.
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