Ranji Trophy: गुजरात के खिलाफ सेमीफाइनल मैच ड्रॉ होने के बाद भी केरल कैसे पहुंचा फाइनल में, जानें…

Ranji Trophy: केरल पहली बार रणजी ट्रॉफी के फाइनल में जगह बनाने में कामयाब रहा है. केरल और गुजरात का मैच ड्रॉ रहा, लेकिन पहली पारी में 2 रन की बढ़त की वजह से इस टीम को फाइनल में जगह मिल गई है. 74 साल के इतिहास में पहली बार केरल फाइनल खेलेगा.

Ranji Trophy: केरल पहली बार रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचा है. सेमीफाइनल मुकाबले में गुजरात के साथ मैच ड्रॉ होने के बावजूद केरल ने फाइनल में प्रवेश कर लिया. अहमदाबाद में नाटकीय घटनाक्रम के साथ उसने केरल फाइनल बर्थ सुरक्षित कर लिया है. पहली पारी में 457 रन बनाने के बाद, केरल गुजरात को 455 रन पर समेटने में सफल रहे. दो रन की बढ़त थी. रणजी नॉकआउट मैचों में, अगर कोई स्पष्ट विजेता नहीं होता है, तो पहली पारी में सबसे अधिक स्कोर बनाने वाली टीम को विजेता घोषित किया जाता है.

2 रन से पिछड़ना गुजरात को पड़ा भारी

इससे पहले क्वार्टर फाइनल में जम्मू और कश्मीर के खिलाफ केरल को एक मामूली जीत मिली थी. गुजरात के खिलाफ पहली पारी में दो रन की बढ़त ने केरल को फाइनल में पहुंचा दिया. यह बढ़त काफी नाटकीय ढंग से मिली. नंबर 10 अरजान नागवासवाला, बाएं हाथ के स्पिनर आदित्य सरवटे का सामना कर रहे थे, उनके इर्द-गिर्द स्लिप और शॉर्ट-लेग था. इस समय, गुजरात केवल दो रन पीछे था.

शॉर्ट लेग फील्डर सलमान निजार के सिर पर लगी गेंद

लेग-साइड की ओर गेंद को उछालने के प्रयास में नागवासवाला ने शॉर्ट-लेग के हेलमेट पर गेंद को मार दिया. गेंद उछल गई और पहली स्लिप में कप्तान सचिन बेबी ने खुशी-खुशी गेंद को पकड़ लिया, जिससे केरल के खिलाड़ियों में जश्न का माहौल बन गया. 10.2 ओवर तक टिके रहने के बाद वे फाइनल में जगह बनाने के करीब पहुंच गए थे, लेकिन उनका सपना टूट गया. बाद में पता चला कि शॉर्ट लेग फील्डर सलमान निजार को अस्पताल ले जाना पड़ा.

गुजरात के कन्कशन सब्सटीट्यूट को लेकर भी हुआ विवाद

हालांकि, केरल प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि यह सिर्फ एहतियाती कदम था. इससे पहले, मैच में गुजरात द्वारा कन्कशन सब्सटीट्यूट के उपयोग को लेकर विवाद हुआ था, जिसमें एक पुछल्ले खिलाड़ी की जगह एक ऑलराउंडर को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया था. दूसरे सेमीफाइनल में विदर्भ ने मुंबई को हराकर पिछले साल का बदला लिया और फाइनल में जगह पक्की कर ली. पिछली बार फाइनल में मुंबई ने विदर्भ को हराया था.

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By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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