Shardiya Navratri 2025: मां कालरात्रि का स्वरूप भले ही देखने में उग्र और भयंकर लगे, लेकिन वे अपने भक्तों को हमेशा शुभ फल ही देती हैं. उनके दाहिने हाथ में वर मुद्रा है, जिससे वे अपने भक्तों को आशीर्वाद और इच्छित फल प्रदान करती हैं। दाहिने तरफ का नीचे वाला हाथ अभय मुद्रा में है, जो यह संदेश देता है कि भक्त निडर और निर्भय रहें. बाईं ओर के ऊपर वाले हाथ में वे लोहे का कांटा धारण करती हैं और नीचे वाले हाथ में खड्ग है. यही कारण है कि उन्हें ‘शुभंकरी’ कहा जाता है, क्योंकि उनके दर्शन से भय नहीं, बल्कि पुण्य और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है.
मां कालरात्रि को लगाएं इन खास चीजों का भोग
धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि को चीकू और गुड़ का नैवेद्य अर्पित करके उसे ब्राह्मण को दान करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है. ऐसा करने से जीवन से शोक और दुखों का नाश होता है और आचानक संकटों से भी रक्षा मिलती है. यह दान केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक संतुलन प्राप्त करने का माध्यम भी है. मान्यता है कि ब्राह्मण को दान किए गए नैवेद्य से देवी का आशीर्वाद कई गुना बढ़कर लौटता है और साधक के जीवन में शांति, सुख और समृद्धि का वास होता है. इसलिए इस दिन चीकू और गुड़ का दान अवश्य करना चाहिए, ताकि मां कालरात्रि की कृपा से जीवन के सभी भय और बाधाएं दूर हो सकें.
मां कालरात्रि पूजा के लाभ
मां कालरात्रि की पूजा करने से भक्तों में साहस, शक्ति और आत्मविश्वास बढ़ता है. उनकी कृपा से जीवन में आने वाले संकट और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं और घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है. साथ ही, मां की भक्ति से भय, बुरी शक्तियां और अशुभ प्रभाव समाप्त हो जाते हैं, जिससे भक्त मानसिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनते हैं.
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