Bhagwan Shiva: भगवान शिव हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं. इन्हें संहारक, भोलेनाथ, आदियोगी और देवों के देव महादेव के नाम से भी जाना जाता है. शास्त्रों में महादेव को अत्यंत भोला बताया गया है. कहा जाता है कि महादेव केवल सच्ची भक्ति देखते हैं. जहां बाकी देवी-देवताओं की पूजा में तरह-तरह के सुगंधित फल और मिठाइयों का अर्पण किया जाता है, वहीं महादेव मात्र एक बेलपत्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं. महादेव सच्चे मन से चढ़ाई गई हर चीज को स्वीकार करते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि जब महादेव हर चीज स्वीकार करते हैं, तो उनकी पूजा में पवित्रता का प्रतीक तुलसी का अर्पण वर्जित क्यों है? आइए जानते हैं इस सवाल का जवाब इस लेख में.
पौराणिक कथा
शिव पुराण के अनुसार, प्राचीन काल में जालंधर नाम का एक शक्तिशाली असुर था. जालंधर भगवान शिव के अंश से उत्पन्न हुआ था, लेकिन स्वभाव से अत्यंत क्रूर और अधर्मी था. उसकी शक्ति का सबसे बड़ा रहस्य उसकी पत्नी वृंदा का पतिव्रत धर्म था.
भगवान शिव और जालंधर के बीच युद्ध
वृंदा भगवान विष्णु की परम भक्त और अत्यंत पवित्र स्त्री थीं. उनके सतीत्व और तप के बल के कारण कोई भी देवता जालंधर को पराजित नहीं कर पा रहा था. जालंधर के बढ़ते अत्याचारों से परेशान होकर सभी देवता भगवान शिव की शरण में पहुंचे. तब भगवान शिव ने देवताओं की रक्षा के लिए जालंधर से युद्ध किया.
भगवान विष्णु का छल और वृंदा का श्राप
वृंदा के पुण्यों के कारण भगवान शिव जालंधर का वध नहीं कर पा रहे थे. तब भगवान विष्णु ने जालंधर का रूप धारण किया और वृंदा के महल में पहुंचे. वृंदा ने उन्हें अपना पति समझकर उनका स्वागत किया, जिससे उनका पतिव्रत धर्म खंडित हो गया. जैसे ही वृंदा का सतीत्व भंग हुआ, भगवान शिव ने जालंधर का वध कर दिया.
सत्य का पता चलने पर वृंदा अत्यंत क्रोधित हुईं और उन्होंने भगवान विष्णु को श्राप दिया. भगवान विष्णु ने वृंदा को बहुत समझाया कि उन्होंने यह सब संसार की रक्षा के लिए किया, लेकिन वृंदा ने उनकी बात नहीं मानी. जिसके बाद भगवान शिव ने वृंदा को पौधा बनने का श्राप दिया.
तुलसी का जन्म
जालंधर के वध के बाद वृंदा ने स्वयं को अग्नि के हवाले कर दिया. जहां उनकी राख गिरी, वहां तुलसी का पौधा उत्पन्न हुआ. तुलसी (वृंदा) के पति जालंधर का वध भगवान शिव ने किया था, इसलिए वे शिवजी को अपना शत्रु मानती थीं. इसी कारण तुलसी ने स्वयं को शिव पूजा में अर्पित होने से वर्जित कर लिया.
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