Gemstone Astrology: गोमेद किसे पहनना चाहिए और किन्हें नहीं? जानें राहु के इस रत्न से जुड़े जरूरी नियम

Gemstone Astrology: क्या आप गोमेद रत्न धारण करने का सोच रहे हैं? अगर हां, तो यह खबर आपके लिए है. ज्योतिषाचार्य से जानें गोमेद रत्न किसे पहनना चाहिए, इसके फायदे क्या हैं और किन लोगों को इसे पहनने से बचना चाहिए.

Gemstone Astrology: ज्योतिष शास्त्र में गोमेद को राहु का रत्न माना गया है. राहु एक छाया और रहस्यमय ग्रह है. इसे चतुर्थ श्रेणी का पाप ग्रह माना जाता है. इसलिए हर व्यक्ति को गोमेद पहनने की सलाह नहीं दी जाती. कुंडली में राहु की स्थिति, भाव और महादशा को देखकर ही इसे धारण करने की सलाह दी जाती है. सही तरीके से इसे धारण करने पर इसे नवनिर्माण, जांच-पड़ताल, भौतिक प्रगति और विदेश यात्रा से संबंधित लाभ मिल सकते है. कई बार यह अचानक गुप्त धन मिलने का योग भी बनाता है. वहीं, गलत तरह से इसे धारण करने से नुकसानदायक परिणाम मिल सकते हैं. ऐसे में आइए ज्योतिषाचार्य डॉ. एन. के. बेरा से जानते हैं कि गोमेद रत्न से जुड़ें जरूरी नियम हैं.

हाथ में गोमेद रत्न की सांकेतिक तस्वीर (एआई)

गोमेद पहनने के फायदे

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, राहु से संबंधित परेशानियों में गोमेद धारण करना लाभकारी हो सकता है. इसे मानसिक भ्रम और आशंकाओं को कम करने में सहायक माना जाता है. यह विचारों में स्पष्टता लाने और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करता है. इसके अलावा, गोमेद को शत्रुओं और विरोधियों से जुड़ी परेशानियों को कम करने तथा निराशा से भरे विचारों को दूर करने के लिए भी धारण किया जा सकता है.

गोमेद किसे पहनना चाहिए?

गोमेद हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता. विशेष स्थिति में राहु की महादशा के दौरान गोमेद धारण करने की सलाह दी जाती है, जैसे:

  • जिन लोगों की कुंडली में राहु अनुकूल स्थिति में हो.
  • राहु की महादशा चल रही हो और कुंडली में गोमेद धारण करना उचित हो.
  • कालसर्प दोष या राहु से संबंधित परेशानी होने पर कुंडली के विश्लेषण के बाद गोमेद धारण किया जा सकता है.

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गोमेद रत्न की इन्फोग्राफिक (एआई)

किस लग्न वालों के लिए गोमेद शुभ है?

वृष, मिथुन, तुला और कुंभ लग्न वाले लोगों के लिए ज्योतिषीय सलाह के बाद गोमेद धारण करना शुभ माना गया हैं.

कुंडली में राहु की इन स्थितियों में पहन सकते हैं गोमेद

कुंडली में राहु केंद्र स्थान यानी प्रथम, चतुर्थ, सप्तम या दशम भाव में हो, तो गोमेद धारण किया जा सकता है. वहीं, लग्न कुंडली में राहु दूसरे, तीसरे, नवम या एकादश भाव में स्थित हो, तब भी कुंडली के अनुसार गोमेद धारण किया जा सकता है.

किन लोगों को गोमेद नहीं पहनना चाहिए?

अगर राहु कुंडली के दूसरे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में हो, तो राहु की महादशा में गोमेद धारण नहीं करना चाहिए.

गोमेद कितने रत्ती का पहनना चाहिए?

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, 5 से 6 रत्ती का गोमेद धारण करना चाहिए.

गोमेद किस धातु में पहनना चाहिए?

गोमेद को पंचधातु या चांदी की अंगूठी में धारण किया जा सकता है.

गोमेद किस उंगली में पहनना चाहिए?

गोमेद को दाएं हाथ की मध्यमा उंगली में धारण करने की सलाह दी जाती है.

गोमेद किस दिन धारण करना चाहिए?

गोमेद को आर्द्रा, शतभिषा और स्वाति नक्षत्र में धारण करना शुभ माना जाता है. इसके अलावा, शुक्ल पक्ष की द्वितीया, पंचमी, दशमी और एकादशी तिथि में किसी भी शनिवार या बुधवार को संध्याकाल में इसे धारण किया जा सकता है.

गोमेद धारण करने की विधि

गोमेद रत्न की सांकेतिक तस्वीर(एआई)
  • शनिवार या बुधवार को स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें.
  • गोमेद को साफ पानी और दूध से शुद्ध करें.
  • पंचधातु या चांदी की अंगूठी में जड़े गोमेद को पूजा के स्थान पर रखें.
  • भगवान गणेश का ध्यान करें.
  • इसके बाद गोमेद की अंगूठी को दाएं हाथ की मध्यमा उंगली में शाम के समय सूर्यास्त के बाद धारण करें.

गोमेद धारण करते समय ध्यान रखें ये बात

गोमेद एक रहस्यमय रत्न माना जाता है. हर व्यक्ति को गोमेद धारण करने की सलाह नहीं दी जाती. विशेष स्थिति में राहु की महादशा के दौरान ही गोमेद धारण करना शुभ माना जाता है. इसे पहनने से पहले ज्योतिषाचार्य से सलाह जरूर लें. बिना कुंडली देखे गोमेद धारण करने से नकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं.

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लेखक के बारे में

By नेहा कुमारी

नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.

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