Mrityu Panchak June 2026: सनातन धर्म और वैदिक ज्योतिष में समय की शुद्धता (मुहूर्त) को विशेष महत्व दिया गया है. किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने से पहले राहुकाल, भद्रा और पंचक जैसे योगों पर विचार किया जाता है. ज्योतिष शास्त्र में पंचक को एक संवेदनशील अवधि माना गया है. जब पंचक शनिवार के दिन से शुरू होता है, तो उसे ‘मृत्यु पंचक’ कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं में इसे पंचकों में सबसे अधिक कष्टकारी माना गया है.
आखिर कैसे बनता है पंचक?
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब चंद्रमा गोचर करते हुए लगातार पांच नक्षत्रों- धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती से होकर गुजरता है, तब उस अवधि को ‘पंचक’ कहा जाता है. यह काल लगभग पांच दिनों तक रहता है.
पंचक किस दिन प्रारंभ होता है, उसी के आधार पर उसका नाम और स्वभाव निर्धारित किया जाता है. सोमवार को शुरू होने वाला पंचक ‘राज पंचक’, मंगलवार को ‘अग्नि पंचक’, शुक्रवार को ‘चोर पंचक’ और शनिवार को आरंभ होने वाला पंचक ‘मृत्यु पंचक’ कहलाता है.
मृत्यु पंचक में शुभ कार्य क्यों माने जाते हैं वर्जित?
ज्योतिष शास्त्र में एक मान्यता प्रचलित है”पंचके पंचगुणं भवेत्”, अर्थात पंचक काल में किए गए कार्यों का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनिवार के स्वामी शनिदेव हैं, जिन्हें न्याय और कर्मफल का देवता माना जाता है. इसी कारण शनिवार से शुरू होने वाले मृत्यु पंचक को कष्टकारी माना जाता है. मान्यता है कि इस अवधि में नए और मांगलिक कार्यों की शुरुआत करने से बाधाएं, मानसिक तनाव या अन्य परेशानियां बढ़ सकती हैं. इसलिए विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है.
पंचक के समय मृत्यु से जुड़ी मान्यता
मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति का निधन पंचक के दौरान होता है, तो उसके अंतिम संस्कार में विशेष शांति कर्म और उपाय किए जाते हैं, जिन्हें ‘पंचक दोष निवारण’ से जोड़ा जाता है. कुछ धार्मिक मान्यताओं और लोककथाओं में यह भी कहा गया है कि पंचक काल में हुई मृत्यु के बाद परिवार पर अन्य संकटों की आशंका बढ़ सकती है.
यहां पढ़ें धर्म से जुड़ी बड़ी खबरें: Religion News in Hindi – Spiritual News, Hindi Religion News, Today Panchang, Astrology at Prabhat Khabar
