घर की गलत दिशा बिगाड़ सकती है किस्मत, जानें वास्तु दोष और उनके समाधान

Vastu Tips for Home: वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की दिशाएं हमारे जीवन की ऊर्जा और संतुलन को सीधे प्रभावित करती हैं. आइए, पंडित जगमोहन तिवारी से प्रमुख दिशाओं से जुड़े वास्तु दोष और उनके निवारण के कुछ सरल उपायों के बारे में जानते हैं.

Vastu Tips for Home: वास्तु शास्त्र एक प्राचीन विज्ञान है, जो हमारे घर और प्रकृति की ऊर्जाओं के बीच संतुलन स्थापित करता है. हमारे घर की प्रत्येक दिशा किसी न किसी ग्रह और तत्व से जुड़ी होती है, जिसका सीधा प्रभाव हमारे स्वास्थ्य, धन और मानसिक शांति पर पड़ता है. सही वास्तु घर में सुख-समृद्धि लाता है, जबकि गलत वास्तु नकारात्मकता को बढ़ाता है. वास्तु विशेषज्ञ पंडित जगमोहन तिवारी के अनुसार, यदि हम दिशाओं से जुड़े दोषों को समझकर छोटे-छोटे और सरल बदलाव करें, तो नकारात्मक ऊर्जा को दूर किया जा सकता है.

पूर्व दिशा का प्रतिनिधि ग्रह: सूर्यदेव

वास्तु दोष का प्रभाव: यदि पूर्व दिशा ऊंची हो या पश्चिमी दीवार से अधिक ऊंची हो, तो आर्थिक अभाव, संतान को कष्ट, पेट/यकृत संबंधी रोग और घर की महिलाओं को अस्वस्थता का सामना करना पड़ सकता है. पूर्व दिशा में शौचालय होना बहुत अशुभ माना जाता है.

बचाव के उपाय: पूर्व दिशा में पानी की टंकी या नल लगवाना शुभ होता है. इस भाग को नीचा और साफ रखें. पूर्वी दीवार पर ‘सूर्य यंत्र’ स्थापित करें.

पश्चिम दिशा का प्रतिनिधि ग्रह: शनिदेव

वास्तु दोष का प्रभाव:  यदि पश्चिम भाग नीचा हो, तो छाती, त्वचा या पेट से संबंधित रोग हो सकते हैं. अकारण धन खर्च होता है. यहां रसोई होने से पित्त या गर्मी के रोग हो सकते हैं.

बचाव के उपाय: पश्चिम दिशा की दीवार को थोड़ा ऊंचा रखें. यहां अशोक का वृक्ष लगाएं और दीवार पर ‘वरुण यंत्र’ स्थापित करें.

उत्तर दिशा का प्रतिनिधि ग्रह: बुध

वास्तु दोष का प्रभाव: यदि उत्तर दिशा ऊंची हो, तो गुर्दे, कान या रक्त संबंधी बीमारियां हो सकती हैं. इससे घर की स्त्रियों का स्वास्थ्य विशेष रूप से प्रभावित होता है.

बचाव के उपाय: उत्तर दिशा में ढलान रखें. पूजा स्थल में ‘बुध यंत्र’ लगाएं और उत्तरी दीवार पर हल्का हरा रंग करवाएं.

दक्षिण दिशा का प्रतिनिधि ग्रह: मंगल

वास्तु दोष का प्रभाव:  यहां गड्ढा, कचरा या पुराना सामान होने से हृदय रोग, जोड़ों का दर्द या उच्च रक्तचाप की समस्या हो सकती है.

बचाव के उपाय:  दक्षिण भाग हमेशा ऊंचा और भारी होना चाहिए. यहां छत पर लाल ध्वजा लगाएं और घर में ‘श्री हनुमंत यंत्र’ या ‘मंगल यंत्र’ स्थापित करें.

उप-दिशाएं (कोण) और उनके प्रभाव

आग्नेय कोण (South-East):  यह अग्नि तत्व का स्थान है. दूषित होने पर घर के सदस्य क्रोधी और बीमार रहते हैं.

नैऋत्य कोण (South-West):  यह राहु का स्थान माना जाता है. यहां गड्ढा या खाली जगह होने से शत्रु भय, दुर्घटना और चरित्र पर आंच आ सकती है.

वायव्य कोण (North-West):  यह चंद्रमा का स्थान है. दोष होने पर शत्रुता बढ़ती है और मानसिक अशांति बनी रहती है.

ईशान कोण (North-East): यह भगवान शिव का स्थान है. यह दिशा ज्ञान और बुद्धि की होती है. इसके दूषित होने से कलह और बुद्धि भ्रमित हो सकती है. इसे हमेशा पवित्र रखें.

कुछ विशेष वास्तु टिप्स

  • लगातार बीमारी: घर के सामने अशोक का पेड़ लगाएं.
  • माइग्रेन/सिरदर्द: बेड कवर सफेद या हल्के रंग का रखें.
  • मधुमेह: शयन कक्ष के उत्तर-पश्चिम में नीले फूलों का गुलदस्ता रखें.
  • एकाग्रता: बच्चों के कमरे की पूर्वी दीवार पीले या गुलाबी रंग की रखें. 

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लेखक के बारे में

Published by: Neha Kumari

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