Varalakshmi Vrat 2026: वर लक्ष्मी व्रत सावन मास शुक्ल पक्ष के अंतिम शुक्रवार को पड़ता है. यह व्रत सुहागिन महिलाओं के सौभाग्य में वृद्धि कराने वाला है. पौराणिक मान्यता अनुसार, निष्ठापूर्वक इस व्रत को रखने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है.
इसके अलावा यह व्रत सुख-समृद्धि में वृद्धि कराने वाला भी माना गया है. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल वर लक्ष्मी व्रत कब रखा जाएगा, तारीख क्या है और इसका महत्व क्या है? आइए जानते हैं.
वरलक्ष्मी व्रत 2026: तारीख और मुहूर्त
वरलक्ष्मी व्रत की तारीख- शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 सूर्योदय- 06 बजे सूर्यास्त- 7:23 बजे तिथि- प्रतिपदा योग- सुकर्मा, 9:06 पीएम नक्षत्र- शतभिषा, शाम 4 बजकर 43 मिनट तक
वरलक्ष्मी व्रत 2026 शुभ योग
ब्रह्म मुहूर्त- 4 बजकर 36 मिनट से 5 बजकर 18 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 15 मिनट से 1 बजकर 09 मिनट तक
विजय मुहूर्त- दोपहर 2 बजकर 56 मिनट से 3 बजकर 49 मिनट तक
अमृत काल- सुबह 10 बजकर 14 मिनट से 11 बजकर 53 मिनट तक
क्यों खास है सावन का वरलक्ष्मी व्रत?
वरलक्ष्मी व्रत के दौरान मुख्य रूप से मां लक्ष्मी का पूजन किया जाता है. यह व्रत सावन शुक्ल पक्ष के आखिरी सोमवार को रखने से दांपत्य जीवन में खुशहाली और सुख-समृद्धि बनी रहती है. धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से पति की आयु लंबी होती है. इसलिए यह व्रत मुख्य रूप से सुहागिन महिलाएं रखती हैं.
चूंकि, यह व्रत धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित है. इसलिए ऐसी मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से धन-दौलत में वृद्धि होती है. साथ ही आर्थिक समृद्धि के द्वार खुलता हैं, जिससे दरिद्रता दूर होती है.
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अष्ट लक्ष्मी के स्वरूप
वरलक्ष्मी व्रत को लेकर धार्मिक मान्यता यह भी है कि इसमें अष्ट लक्ष्मी की पूजा है, जिनमें धन लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी, यश लक्ष्मी, कीर्ति लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, आदि लक्ष्मी और विजय लक्ष्मी आती हैं.
