Tusu Parab 2026: इस दिन मनाया जाएगा टुसू पर्व, झारखंड से है खास संबंध

Tusu Parab 2026: टुसू पर्व झारखंड और आसपास के आदिवासी क्षेत्रों का प्रमुख फसल पर्व है. यह उत्सव मकर संक्रांति पर मनाया जाता है, जिसमें कृषि, प्रकृति, लोकसंस्कृति और सामूहिक जीवन की परंपराएं देखने को मिलती हैं.

Tusu Parab 2026: टुसू उत्सव झारखंड, पश्चिमी बंगाल, असम और ओडिशा के आदिवासी समुदायों का एक प्रमुख फसल पर्व है. यह पर्व पौष महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी से आरंभ होकर मकर संक्रांति के दिन अपने चरम पर पहुंचता है. वर्ष 2026 में टुसू पर्व 14 जनवरी, बुधवार को मकर संक्रांति के दिन मनाया जाएगा. यह त्योहार मुख्य रूप से आदिवासी समाज द्वारा मनाया जाता है, जिसमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, कृषि संस्कृति और सामूहिक जीवन की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है.

टुसू पर्व की तिथि और आयोजन

टुसू पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन, प्रेम, संघर्ष और स्त्री-शक्ति की प्रतीकात्मक गाथा है. इस पर्व में धान की नई फसल के आगमन की खुशी मनाई जाती है. खेतों में मेहनत के बाद जब फसल घर आती है, तब समाज एकजुट होकर उत्सव मनाता है. पारंपरिक टुसू गीत, लोकनृत्य और विशेष पकवान इस पर्व की पहचान हैं. महिलाएं इसमें विशेष भूमिका निभाती हैं और लोकगीतों के माध्यम से अपने भाव, संघर्ष और आशाएं व्यक्त करती हैं.

धान की नई फसल और सामूहिक उल्लास

टुसू पर्व की उत्पत्ति सीधे तौर पर कृषि से जुड़ी मानी जाती है. जब किसान धान की कटाई-गहाई पूरी कर लेते हैं, तब यह उत्सव आरंभ होता है. इतिहासकारों के अनुसार, इस पर्व का संबंध सूर्य उपासना और उर्वरता की पूजा से भी है. चूंकि यह पर्व माघ संक्रांति के आसपास मनाया जाता है, इसलिए इसे संक्रांति पर्व से जोड़कर देखा जाता है, जो सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है.

आधुनिक समय में टुसू उत्सव का सामाजिक महत्व

टुसू पर्व का उल्लेख सदियों पुराना है. समय के साथ यह केवल धार्मिक आयोजन न रहकर एक सामाजिक और सांस्कृतिक आंदोलन का रूप ले चुका है. इसमें समाज की एकता, लोकजीवन की मिठास और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की भावना झलकती है. टुसू उत्सव आदिवासी संस्कृति की जीवंत पहचान है, जो आज भी परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाए हुए है.

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लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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