ग्रहण का गर्भस्थ बच्चे पर क्या पड़ता है असर? जानें धार्मिक आस्था, मान्यता और इससे बचने के पीछे की असली वजह

सूर्य या चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को लेकर कई सावधानियां बताई जाती हैं. जानें गर्भस्थ बच्चे पर ग्रहण के प्रभाव से जुड़ी धार्मिक मान्यता, मंत्र जाप और परंपराओं के पीछे की वजह और वैज्ञानिक दृष्टिकोण क्या कहता है.

Eclipse Pregnancy Effects: सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण को लेकर भारतीय धार्मिक परंपराओं में कई मान्यताएं प्रचलित हैं. इनमें गर्भवती महिलाओं और उनके गर्भ में पल रहे बच्चे को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण के दौरान गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा के लिए कुछ नियमों का पालन करना चाहिए.

15 दिनों के अंतराल में लगने वाले हैं दो ग्रहण

अगस्त 2026 में महज 15 दिनों के अंतराल में दो बड़े ग्रहण पड़ने वाले हैं. 12-13 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण और इसके बाद 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण होगा. हालांकि, दोनों ही ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे. ऐसे में यहां इनके सूतक काल की मान्यता नहीं होगी.

भारत में ग्रहण नजर नहीं आने के कारण रक्षाबंधन सहित अन्य शुभ कार्यों पर इसका कोई धार्मिक प्रतिबंध नहीं रहेगा. मंदिरों में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान भी सामान्य रूप से किए जा सकेंगे. यानी दोनों ग्रहणों का भारत में दैनिक जीवन और धार्मिक गतिविधियों पर प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ेगा.

ग्रहण के दौरान गर्भस्थ शिशु को लेकर क्या मान्यता है?

हिंदू धार्मिक परंपरा में ग्रहण को सामान्य समय से अलग और संवेदनशील अवधि माना गया है. मान्यता है कि ग्रहण के दौरान सूर्य या चंद्रमा पर राहु-केतु का प्रभाव पड़ता है. इसी कारण इस समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की बात कही जाती है. धार्मिक विश्वास के अनुसार गर्भ में पल रहा शिशु अत्यंत संवेदनशील होता है, इसलिए ग्रहण के प्रभाव से उसकी रक्षा करने के लिए गर्भवती महिलाओं को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.

गर्भवती महिलाओं को क्यों दी जाती है विशेष सलाह?

पुरानी मान्यताओं में ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को घर के अंदर रहने, भगवान का ध्यान करने और मंत्र जाप करने की सलाह दी जाती है. कुछ परंपराओं में चाकू, कैंची या सुई जैसी नुकीली वस्तुओं के इस्तेमाल से बचने की बात भी कही जाती है. इसके पीछे मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिला को शांत रखने और किसी तरह की अनहोनी से बचाने की धार्मिक भावना मानी जाती है.

मंत्र जाप और पूजा का क्या है महत्व?

ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण के दौरान महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र या भगवान के नाम का जाप करना शुभ माना जाता है. माना जाता है कि इससे मन शांत रहता है और ईश्वर का स्मरण सकारात्मक भाव पैदा करता है. ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और पूजा करने की भी परंपरा है.


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क्या विज्ञान भी गर्भस्थ शिशु को खतरा मानता है?

यहां धार्मिक मान्यता और वैज्ञानिक तथ्य को अलग-अलग समझना जरूरी है. वैज्ञानिक प्रमाणों के अनुसार सामान्य सूर्य या चंद्र ग्रहण से गर्भ में पल रहे बच्चे को सीधे नुकसान होने का प्रमाण नहीं है. हालांकि सूर्य ग्रहण को बिना उचित सुरक्षा के सीधे आंखों से देखना आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए गर्भवती समेत सभी लोगों को इसे देखने के लिए प्रमाणित सोलर फिल्टर का इस्तेमाल करना चाहिए.

धार्मिक आस्था का रखें सम्मान

गर्भवती महिला यदि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान मंत्र जाप, पूजा या अन्य परंपराओं का पालन करना चाहती हैं, तो कर सकती हैं. लेकिन डर या चिंता में रहने की जरूरत नहीं है. गर्भावस्था में किसी भी विशेष स्वास्थ्य समस्या या चिकित्सकीय सलाह की जरूरत हो तो डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता देना सबसे जरूरी है.


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लेखक के बारे में

By शौर्य पुंज

मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.

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