Skanda Sashti 2026 May: स्कन्द षष्ठी हिंदू धर्म का एक पवित्र व्रत है. यह भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र तथा देवताओं के सेनापति भगवान कार्तिकेय को समर्पित है. यह पर्व हर माह शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मासिक स्कन्द षष्ठी के रूप में मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा से भगवान कार्तिकेय की पूजा और व्रत करते हैं, उन्हें जीवन के हर संकट से मुक्ति मिलती है तथा साहस और विजय की प्राप्ति होती है.
स्कन्द षष्ठी मई 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के प्रारंभ और समाप्ति का समय इस प्रकार है:
- षष्ठी तिथि प्रारंभ: 21 मई 2026 को सुबह 08:27 बजे से
- षष्ठी तिथि समाप्त: 22 मई 2026 को सुबह 06:25 बजे तक
उदयातिथि और शास्त्रों के नियमों के अनुसार, स्कन्द षष्ठी का व्रत 21 मई 2026 को ही रखा जाएगा.
स्कन्द षष्ठी व्रत की सरल पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. यदि संभव हो तो इस दिन लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनें. इन रंगों को पूजा के समय पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है.
- पूजा घर में भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय की मूर्ति या तस्वीर के सामने हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें.
- भगवान कार्तिकेय को रोली, चंदन, अक्षत, पीले फूल, फल, धूप और दीप अर्पित करें. उन्हें भोग में फल या मिठाई चढ़ाएं.
- भगवान कार्तिकेय के मंत्र “ॐ शरवणभवाय नमः” का 108 बार जाप करें.
- इस दिन ‘स्कन्द षष्ठी कवचम्’ का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है. इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है.
- अंत में कपूर या दीपक जलाकर आरती करें.
स्कन्द षष्ठी का धार्मिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी तिथि पर भगवान कार्तिकेय ने अत्यंत क्रूर असुर तारकासुर और सूरपद्मन का वध कर देवताओं को उनके अत्याचारों से मुक्त कराया था. इसलिए उन्हें ‘युद्ध के देवता’ भी कहा जाता है.
इसके साथ ही यह मान्यता भी है कि यह व्रत रखने से संतान की रक्षा होती है और उन्हें लंबी आयु का वरदान मिलता है. भगवान कार्तिकेय को मंगल ग्रह का स्वामी माना जाता है. इस दिन उनकी पूजा करने से कुंडली में स्थित मंगल दोष शांत होता है.
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