Shattila Ekadashi 2026: तिल के बिना अधूरी है षटतिला एकादशी, जानें इसका महत्व और उपयोग

Shattila Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की आराधना की जाती है. इस दिन तिल का विशेष महत्व होता है. तिल के बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है. आइए जानते हैं कि षटतिला एकादशी के दिन तिल का इस्तेमाल किन-किन चीजों में किया जाता है.

By Neha Kumari | January 13, 2026 10:44 PM

Shattila Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी के दिन तिल दान, व्रत और पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है. माघ मास के कृष्ण पक्ष की यह एकादशी धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और श्रद्धा, संयम एवं दान के साथ किया जाता है. मान्यता है कि इस दिन किया गया उपवास और दान कई गुना फल प्रदान करता है. विशेष रूप से इस एकादशी पर तिल का प्रयोग अत्यंत शुभ और फलदायक माना गया है.

षटतिला एकादशी क्यों है विशेष?

षटतिला एकादशी का नाम ही इसके महत्व को दर्शाता है. ‘षट’ का अर्थ है छह और ‘तिला’ का अर्थ है तिल. इस दिन तिल का छह प्रकार से प्रयोग करने का विधान बताया गया है. शास्त्रों के अनुसार तिल भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है. इसके प्रयोग से दरिद्रता दूर होती है, पापों का नाश होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.

षटतिला एकादशी पर तिल का उपयोग

शास्त्रों में तिल को अत्यंत पवित्र माना गया है. षटतिला एकादशी के दिन तिल का उपयोग छह प्रकार से किया जाता है, जैसे—तिल से स्नान करना, तिल का उबटन लगाना, तिल से हवन करना, तिल का दान करना, तिल का सेवन करना और तिल से बने पकवानों का भगवान को भोग लगाना. मान्यता है कि ऐसा करने से मन शुद्ध होता है, जीवन से नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

षटतिला एकादशी 2026 की तिथि और व्रत पारण समय

  • षटतिला एकादशी तिथि: 14 जनवरी 2026, बुधवार
  • एकादशी तिथि आरंभ: 13 जनवरी 2026 को दोपहर 3 बजकर 17 मिनट से
  • एकादशी तिथि समाप्त: 14 जनवरी 2026 को शाम 5 बजकर 52 मिनट तक
  • व्रत पारण का शुभ समय: 15 जनवरी 2026 को सुबह 7 बजकर 15 मिनट से 9 बजकर 21 मिनट के बीच

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