Shani Pradosh Vrat 2026: साल 2026 के ज्येष्ठ मास का दूसरा प्रदोष व्रत 27 जून, शनिवार को रखा जाएगा. शनिवार के दिन पड़ने के कारण इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है. हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व माना जाता है. मान्यता है कि जो भक्त इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करता है और व्रत रखता है, उसे भगवान शिव के साथ-साथ शनिदेव की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है. इससे जीवन के दुख-दर्द और कष्ट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि और खुशहाली का आगमन होता है.
शनि प्रदोष व्रत 2026: शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा हमेशा सूर्यास्त के समय, अर्थात प्रदोष काल में की जाती है.
- त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 26 जून, रात 10:22 बजे से
- त्रयोदशी तिथि समाप्त: 28 जून, रात 12:43 बजे (मध्यरात्रि) तक
- प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: 27 जून, शाम 7:04 बजे से रात 9:06 बजे तक
शनि प्रदोष व्रत पूजा सामग्री
- गंगाजल
- शुद्ध जल
- दूध
- दही
- घी
- शहद
- बेलपत्र
- धतूरा
- आक के फूल
- सफेद चंदन
- अक्षत (चावल)
- धूप
- दीपक
- घी
- कलावा (मौली)
- कपूर
- फल
- मिठाई
- काले तिल
- सरसों का तेल
शनि प्रदोष व्रत पूजा विधि
सुबह ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के बाद स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें. पूरे दिन फलाहार या निराहार रहकर व्रत का पालन करें और मन ही मन ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते रहें.
शाम को प्रदोष काल से पहले पुनः स्नान करें. शुभ मुहूर्त में भगवान शिव का पूजन प्रारंभ करें. सबसे पहले शिवलिंग पर जल अर्पित करें, फिर पंचामृत से अभिषेक करें. इसके बाद पुनः शुद्ध जल चढ़ाकर सफेद चंदन का तिलक लगाएं.
अब भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, काले तिल, सरसों का तेल (दीपक में) तथा पुष्प अर्पित करें. धूप और घी का दीपक जलाएं. इसके बाद फल और मिठाई का भोग लगाएं. फिर प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें तथा शिव चालीसा का पाठ करें. अंत में कपूर या घी का दीपक जलाकर भगवान शिव की आरती करें और उनसे सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य एवं शनि दोष से मुक्ति की प्रार्थना करें.
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