Sawan Somwar Vrat Niyam: सावन का सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ दिनों में माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने तथा शिव पूजा करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. लेकिन सावन सोमवार का व्रत केवल उपवास रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कुछ विशेष नियम का पालन करना भी आवश्यकता हैं. आइए जानते हैं कि सावन सोमवार के दिन क्या करना चाहिए और किन बातों से बचना चाहिए.
सावन सोमवार के दिन क्या करें?
- ब्रह्म मुहूर्त में जागरण व स्नान: सावन सोमवार के दिन सुबह सूर्योदय से पूर्व (ब्रह्म मुहूर्त) उठें. स्नान के पश्चात स्वच्छ एवं हल्के रंग (जैसे सफेद, हरा या पीला) के वस्त्र धारण कर व्रत एवं पूजन का संकल्प लें.
- शिवलिंग का पंचामृत अभिषेक: शिवलिंग पर जल, गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें.
- शुभ पूजन सामग्री अर्पित करें: शिवजी को बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद चंदन, आक (मदार) के फूल और मौसमी फल चढ़ाएं.
- मंत्र जाप व पाठ: पूजन के समय निरंतर 'ॐ नमः शिवाय', महामृत्युंजय मंत्र या शिव चालीसा का पाठ करें. इससे मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है.
- श्रद्धापूर्वक व्रत व दान: अपनी क्षमतानुसार फलाहारी या निर्जला व्रत का पालन करें. इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या सामर्थ्य अनुसार दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है.
- सात्विक आचरण: मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखें. पूरे दिन मन में ईश्वर का ध्यान रखें और बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें.
क्या भूलकर भी न करें?
- तामसिक भोजन से सख्त परहेज: व्रत रखने वाले व्यक्ति और घर के अन्य सदस्यों को भी इस दिन मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज और अत्यधिक मसालेदार पदार्थों से दूर रहना चाहिए.
- तुलसी दल और वर्जित सामग्री न चढ़ाएं: शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव की पूजा में तुलसी दल, हल्दी, केतकी के फूल, कुमकुम और सिंदूर अर्पित नहीं किया जाता. साथ ही शंख से भी शिवलिंग पर जल न चढ़ाएं.
- क्रोध, झूठ और अपशब्द से बचें: इस पवित्र दिन किसी का अनादर या अपमान न करें. झूठ बोलने, चुगली करने या किसी भी प्रकार के विवाद से खुद को दूर रखें.
- देर तक न सोएं और आलस्य त्यागें: सावन सोमवार के दिन सुबह देर तक सोना वर्जित माना गया है. आलस्य को त्याग कर सुबह जल्दी उठकर पूजा-आराधना में शामिल हों.
- तांबे के पात्र से दूध न चढ़ाएं: शिवलिंग पर दूध अर्पित करने के लिए तांबे के बर्तन का प्रयोग न करें. दूध के लिए पीतल, कांसा या चांदी के पात्र का ही उपयोग करें.
