Sawan Shivratri: श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि यानी आज 11 अगस्त 2026, मंगलवार को सावन शिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जा रहा है. यह पर्व देवों के देव महादेव को समर्पित है. इस दिन भक्त भगवान भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं. धार्मिक मान्यता है कि सावन शिवरात्रि का व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सभी संकट दूर होते हैं.
पूजा और जलाभिषेक के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:23 बजे से सुबह 06:00 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:06 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:04 बजे से रात 08:09 बजे तक
- निशिता काल: मध्यरात्रि 12:05 बजे से रात 12:48 बजे तक
सावन शिवरात्रि पूजा विधि
सावन शिवरात्रि के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें. शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, शहद और जल से अभिषेक करें. इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और सफेद फूल अर्पित करें. महादेव को मिठाई और फलों का भोग लगाएं. इसके बाद भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें और व्रत कथा का पाठ करें. अंत में शिव जी की आरती करें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें.
भगवान शिव के मंत्र
ॐ नमः शिवाय ।
ॐ नमो भगवते रुद्राय।
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि।तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
“ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥”
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शिव जी की आरती
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा...
एकानन चतुरानन पंचानन राजे। हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा...
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे। त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव ओंकारा...
अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी। त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा...
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव ओंकारा...
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूलधारी। सुखकारी दुखहारी जगपालनकारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा...
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका॥ ॐ जय शिव ओंकारा...
त्रिगुणस्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे। कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय शिव ओंकारा...
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