Swarved Mahamandir: शारदीय दुर्गा पूजा 2026 को भव्य बनाने के लिए श्रीराम लला पूजा समिति ने वाराणसी के विश्व प्रसिद्ध स्वर्वेद महामंदिर धाम के प्रारूप पर पंडाल बनाने का निर्णय लिया है.
दुर्गा पूजा की तैयारियों को लेकर हुई महत्वपूर्ण बैठक
शारदीय दुर्गा पूजा की तैयारियों को लेकर रविवार को श्रीराम लला पूजा समिति की बैठक मेन रोड स्थित संकट मोचन मंदिर में आयोजित की गई. बैठक में समिति के महासचिव कुणाल अजमानी ने बताया कि पिछले दो वर्षों से समिति भव्य और आकर्षक दुर्गा पूजा का आयोजन कर रही है. इस वर्ष पूजा महोत्सव 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा.
स्वर्वेद महामंदिर धाम के प्रारूप पर बनेगा पंडाल
बैठक में बताया गया कि हाल ही में समिति के अध्यक्ष अशोक चौधरी के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने वाराणसी स्थित स्वर्वेद महामंदिर धाम का भ्रमण किया था. इसके बाद सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि समिति के तीसरे वर्ष के आयोजन में रांची जिला स्कूल के मैदान में स्वर्वेद महामंदिर का भव्य प्रतिरूप तैयार किया जाएगा. इस अनूठी थीम के जरिए श्रद्धालुओं को वाराणसी के प्रसिद्ध ध्यान केंद्र के दर्शन कराने का प्रयास किया जाएगा.
पिछले दो वर्षों में भी आकर्षण का केंद्र रहे पंडाल
समिति के अध्यक्ष अशोक चौधरी और महासचिव कुणाल अजमानी ने बताया कि वर्ष 2024 में प्रथम दुर्गा पूजा के दौरान अयोध्या के श्रीराम मंदिर की तर्ज पर पंडाल बनाया गया था. वहीं 2025 में गुजरात के भुज स्थित स्वामीनारायण मंदिर का भव्य प्रारूप प्रस्तुत किया गया, जिसे लोगों ने काफी सराहा. अब तीसरे वर्ष में स्वर्वेद महामंदिर को थीम के रूप में चुना गया है.
60 दिनों में तैयार होगा भव्य पंडाल
समिति के अनुसार, स्वर्वेद महामंदिर के स्वरूप को तैयार करने में लगभग 60 दिनों का समय लगेगा. इसलिए अगस्त माह में भूमि पूजन के साथ निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा. पंडाल निर्माण में विशेष कलात्मकता और वास्तुकला का ध्यान रखा जाएगा ताकि यह मूल मंदिर की भव्यता को दर्शा सके.
दुनिया का सबसे बड़ा ध्यान केंद्र है स्वर्वेद महामंदिर
स्वर्वेद महामंदिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सारनाथ से करीब चार किलोमीटर दूर उमरा गांव में स्थित है. वर्ष 2023 में बनकर तैयार हुआ यह सात मंजिला विशाल परिसर लगभग तीन लाख वर्ग फीट क्षेत्र में फैला हुआ है. 180 फीट ऊंचे इस भव्य मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां एक साथ 20 हजार लोग ध्यान कर सकते हैं. मकराना संगमरमर और गुलाबी बलुआ पत्थरों से निर्मित इस मंदिर की दीवारों पर स्वर्वेद के हजारों श्लोक अंकित हैं, जो इसकी आध्यात्मिक और स्थापत्य भव्यता को और बढ़ाते हैं.
