प्रेमानंद जी महाराज: घर हो या बाहर, खाना खाने से पहले बस कर लें ये एक काम, होगा कल्याण

Premanand Ji Maharaj: प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, भोजन करने से पहले भगवान को भोग अर्पित करना बेहद शुभ माना गया है. लेकिन यदि आप घर से बाहर हों, तो क्या करें? जानिए मानसिक भोग लगाने का तरीका और इससे जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण बातें.

Premanand Ji Maharaj: भारत के प्रसिद्ध हिंदू आध्यात्मिक गुरु और संत प्रेमानंद जी महाराज ने प्रतिदिन भोजन करने से पहले श्रद्धापूर्वक भगवान को भोग लगाने की सलाह दी है. महाराज का कहना है कि सच्चे मन से भगवान को भोग लगाने से व्यक्ति का कल्याण होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इसलिए भगवान को भोग लगाए बिना भोजन नहीं करना चाहिए.

बाहर खाना खाते समय भोग कैसे लगाएं?

प्रेमानंद जी महाराज ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति घर से बाहर भोजन कर रहा हो और भगवान को प्रत्यक्ष रूप से भोग नहीं लगा सकता हो, तो ऐसी स्थिति में मानसिक रूप से भोग लगाना चाहिए. महाराज के अनुसार, जब आपके सामने भोजन परोसा जाए, तो उसे ग्रहण करने से पहले हाथ जोड़कर भगवान का स्मरण करें. मन ही मन भगवान को इस भोजन के लिए धन्यवाद दें और कहें, “प्रभु, आपकी कृपा से मुझे यह भोजन प्राप्त हुआ है. मैं इसे आपको अर्पित करता हूं.” इसके बाद भगवान का जयकारा लगाकर श्रद्धापूर्वक भोजन ग्रहण करें.

भोजन तामसिक हो तो क्या करें?

प्रेमानंद जी महाराज ने बताया कि भगवान को कभी भी तामसिक भोजन का भोग नहीं लगाना चाहिए. यदि भोजन में प्याज, लहसुन, मांस, मछली, अंडा या अन्य तामसिक पदार्थ शामिल हों, तो उसका मानसिक भोग भी भगवान को नहीं लगाना चाहिए. इसे उचित नहीं माना जाता है. भगवान को हमेशा सात्विक भोजन ही अर्पित करना चाहिए.

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By Neha kumari

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