Pradyumna Chaturthi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को प्रद्युम्न विनायक चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जाता है. यह त्योहार हिंदू धर्म में प्रथम पूज्य एवं विघ्नहर्ता भगवान गणेश को समर्पित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष दिन भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और रुके हुए कार्य पूर्ण होने लगते हैं.
प्रद्युम्न चतुर्थी शुभ मुहूर्त 2026
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 17 जून 2026, रात 09:38 बजे से
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 18 जून 2026, शाम 06:58 बजे तक
- पूजा का मध्याह्न मुहूर्त: सुबह 10:58 बजे से दोपहर 01:46 बजे तक
प्रद्युम्न चतुर्थी के दिन क्या न करें?
चंद्र दर्शन करने से बचें
विनायक चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन को वर्जित माना गया है. मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा को देखने से व्यक्ति पर झूठा कलंक या अपयश लग सकता है. इसलिए इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से बचना चाहिए.
तुलसी दल न चढ़ाएं
भगवान गणेश की पूजा में तुलसी दल अर्पित करना वर्जित माना गया है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, गणेश जी ने तुलसी जी के विवाह प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था. इससे क्रोधित होकर तुलसी जी ने उन्हें श्राप दिया, जिसके बाद गणेश जी ने तुलसी को अपनी पूजा में वर्जित कर दिया.
तामसिक भोजन और विवाद से दूर रहें
इस दिन घर में सात्विक वातावरण बनाए रखना चाहिए. भूलकर भी मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन न करें. साथ ही, किसी भी प्रकार के वाद-विवाद, क्रोध या अपशब्दों के प्रयोग से बचें, अन्यथा व्रत का पुण्य फल कम हो सकता है.
पशु-पक्षियों को न सताएं
भगवान गणेश का वाहन मूषक (चूहा) है और वे गजमुख स्वरूप में पूजे जाते हैं. इसलिए इस दिन किसी भी पशु-पक्षी या बेजुबान जीव को कष्ट न पहुंचाएं. विशेष रूप से चूहों को नुकसान पहुंचाने से बचें.
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