Pradyumna Chaturthi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को प्रद्युम्न विनायक चतुर्थी मनाई जाती है. ‘प्रद्युम्न’ का अर्थ अत्यंत तेजस्वी और ऊर्जा से भरपूर होता है. यह त्योहार भगवान गणेश को समर्पित है. धार्मिक मान्यता है कि जो भी भक्त इस दिन भगवान गणेश की पूजा और व्रत करता है, उसके जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं, आर्थिक तंगी से राहत मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है.
प्रद्युम्न चतुर्थी तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि का आरंभ 17 जून की रात 09:38 बजे हो चुका है और इसका समापन आज 18 जून 2026 को शाम 06:58 बजे होगा. उदयातिथि की मान्यता के कारण व्रत और मुख्य पूजा आज, गुरुवार को ही की जा रही है.
विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की आरती
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
एकदंत दयावंत, चार भुजा धारी,
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी.
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
पान चढ़े, फल चढ़े और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा.
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया.
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी,
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी.
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
भगवान गणेश की जय,
पार्वती के लल्ला की जय,
ॐ गं गणपतये नमः.
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