Pradeep Mishra Viral Video: हरतालिका तीज को लेकर महिलाओं में खास उत्साह रहता है. इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं. इस साल हरतालिका तीज का पर्व 14 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा. पूजा के दौरान शिव-पार्वती को अलग-अलग तरह की पूजन सामग्री अर्पित करने की परंपरा है. इसी बीच कथावाचक प्रदीप मिश्रा का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने हरतालिका तीज की पूजा की थाली को लेकर खास बात कही है.
पड़ोसन की थाली से अपनी थाली की तुलना न करें
वायरल वीडियो में कथावाचक प्रदीप मिश्रा कहते हैं कि हरतालिका तीज पर आप पूजा की थाली में जो भी सामग्री श्रद्धा से लेकर जाते हैं, उसे भगवान शिव स्वीकार करते हैं. ऐसा जरूरी नहीं है कि आपकी थाली में पड़ोसन की थाली जितनी या उससे ज्यादा सामग्री हो, तभी आपकी पूजा स्वीकार होगी. भगवान के लिए पूजा में सामग्री की मात्रा से ज्यादा श्रद्धा और भावना का महत्व है.
सामग्री न हो तो पत्तियों से करें शिवजी को अर्पित
कथावाचक प्रदीप मिश्रा के अनुसार, शिव पुराण की कथा में भी ऐसी स्थिति का उल्लेख मिलता है कि अगर किसी के पास हरतालिका तीज की पूजा के लिए कोई विशेष सामग्री उपलब्ध नहीं है, तो वह पांच पेड़ों की पत्तियां लेकर उन्हें भगवान शिव को समर्पित कर सकता है. यानी पूजा के लिए बहुत अधिक सामग्री जुटाना जरूरी नहीं है.
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व्रत न रखने वाली महिलाएं भी कर सकती हैं फुलेरे के दर्शन
उन्होंने यह भी बताया कि जो माताएं हरतालिका तीज का व्रत नहीं रखतीं, वे मंदिर या घर में जहां फुलेरा बांधा गया हो, वहां जाकर 5 या 7 फुलेरों के दर्शन कर सकती हैं. पुरुष भी फुलेरे के दर्शन करके अपने मन की इच्छा भगवान के सामने रख सकते हैं.
क्या होता है फुलेरा?
हरतालिका तीज की पूजा में फूलों और पत्तियों से तैयार किया गया फुलेरा विशेष महत्व रखता है. यह एक तरह का पुष्प मंडप होता है, जिसे शिव-पार्वती की पूजा के ऊपर सजाया जाता है. कई परंपराओं में फुलेरे में पांच फूलों की लड़ियां रखी जाती हैं, जिन्हें भगवान शिव की पांच पुत्रियों जया, विषहरा, शामिलबारी, देव और दोतली का प्रतीक माना जाता है.
हरतालिका तीज का संदेश यही है कि पूजा में दिखावे से ज्यादा श्रद्धा और भक्ति महत्वपूर्ण है. इसलिए पूजा की थाली में सामग्री कम होने पर चिंता करने के बजाय सच्चे मन से शिव-पार्वती का स्मरण करना चाहिए.
