Pitra Dosh: कुंडली में पितृ दोष कब और कैसे लगता है? जानें लक्षण के साथ किन-किन समस्याओं से झूझते ऐसे लोग

Pitra Dosh: अकसर देखा जाता है कि ज्यादातर लोग पितृ दोष से परेशान रहते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पितृ दोष की समस्या हर घर में रहती है पर कोई इसे मानता है, तो कोई नहीं मानता है. ये सबकी अपनी अपनी मर्जी है. लेकिन पितृ दोष जिनके घरों में लगा होता है उनके घर की स्तिथि वहीं समझ सकते हैं. आइए जानते है कि पितृ दोष क्या है?

Pitra Dosh: पितृ दोष होता क्या है ? पितृ दोष यानी पित्रों का दोष होता है. पित्रों का दोष लगता कैसे है? यह विषय बड़ा है. हर व्यक्ति यही जानना चाहता है कि पितृ दोष कब और कैसे लगता है. ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि जब हमारे घरों में किसी की अकाल मृत्यु होती है तो वह प्रेत बन के भटकता है. वहीं प्रेत अपनी मुक्ति के लिए जब हमे परेशान करता है तो उसे ही पितृ दोष कहते हैं.

अकाल मृत्यु होती क्या है?

अकाल मृत्यु का मतलब जरूरी नहीं है कि एक्सीडेंट या सुसाइड से मौत होना पर ही होता है. अकाल मृत्यु का मतलब है अ+काल यानी काल से पहले. काल का मतलब होता है समय यानी समय से पहले जब किसी की मौत उसके निर्धारित समय से पहले हो जाती है तो उसे अकाल मृत्यु कहते हैं. आज के जीवन और आज के खान पान के अनुसार हर मनुष्य की लगभग 70 से 80 के बीच की उम्र ही पूरी उम्र मानी जाती है, जो व्यक्ति 50 या 55 साल के आस पास मरता है या इससे कम उम्र में उसे अकाल मृत्यु ही कहेंगे. लेकिन जो 50–55 के आस पास मरा और अपनी मौत से मरा होगा तो वो भी अकाल मृत्यु ही होगी. हालांकि मरने वाले का सही ढंग से क्रिया करम कर दिया जाए तो उसके मुक्ति का रास्ता बन जाता है. वहीं दूसरी अकाल मृत्यु वह होती है, जिनमे कोई एक्सीडेंट से मरा हो या सुसाइड किया हो तो ऐसी आत्मा का क्रिया करम करने से भी वो मुक्त नहीं होती है, उनके लिए अलग पूजन कराना पड़ता है.

घर में इस तरह भटकती हैं आत्माएं

इस तरह की आत्माएं घर में भटकती हैं. घर में भटकती आत्मा आपको परेशान करती है. जब आपके घर में प्रेत का वास होगा यानी आपके घर में जो अकाल मृत्यु को प्राप्त हुआ वो रहेगा तो अपने घर में ही न कहा जायेगा तो जब घर में प्रेत का वास हो जाए तो अपने आप बिना उनके परेशान किए ही आपके घर में परेशानी आने लगती है. क्योंकि घर में प्रेत का वास होता है जहां प्रेत रहते हैं वहा अपने आप नेगेटिविटी रहती है तो वहां किसी का काम कैसे बन सकता है तो इसी को पितृ दोष कहते हैं यानी पितरों का दोष जो अपनी उम्र पूरी कर के मरते हैं वह पितृ देव होते हैं. वह पूजनीय होते हैं. लेकिन जो अकाल मृत्यु को प्राप्त होते हैं वह पितृ प्रेत होते हैं तो ऐसा जिनके घरों में यह समस्या है यानी पित्र प्रेत है या पितृ दोष लगा है, उनके घरों में कई प्रकार की दिक्कते आती हैं.

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ज्यादातर लोगों के घर में बरकत नहीं होती है?

ज्यादातर लोगों के घर में बरकत नहीं होती है और वो आगे नहीं बढ़ पाते हैं. ऐसे लोग आर्थिक समस्या से झूझते रहते हैं. विवाह में भी परेशानी आती हैं. किन्ही किन्ही के यहां ऐसा होता है की घर का आदमी कोई भी कार्य करता है और उसे सफलता नहीं मिलती है. काम अंत में सबकुछ खराब हो जाता है. किसी के यहां संतान होने में समस्या होती है या किन्ही के यहां संतान होती है तो सिर्फ लड़की होती है. वंश आगे नहीं बढ़ता और बार-बार आर्थिक झटके लगते हैं. संतान हानि होने लगती है. यह पितृ दोष के कुछ प्रमुख लक्षण हैं.

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लेखक के बारे में

राधेश्याम कुशवाहा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से MJ (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) की शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत भोपाल से प्रकाशित राज एक्सप्रेस समाचार पत्र से की. इसके बाद उन्होंने समय जगत, राजस्थान पत्रिका और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं. वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म, अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 13 वर्षों का अनुभव रखने वाले राधेश्याम कुशवाहा को ज्योतिष शास्त्र, पंचांग गणना, ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, व्रत-त्योहारों की तिथियों तथा शुभ मुहूर्तों का गहन ज्ञान है. अपनी विशेषज्ञता के आधार पर वे धर्म-अध्यात्म और राशिफल से जुड़ी सटीक, तथ्यपरक एवं विश्वसनीय खबरें लिखते हैं. धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन में उनकी विशेष रुचि है. इसके अलावा राजनीति, अपराध और प्रेरणादायक (पॉजिटिव) विषयों पर लेखन में भी उनकी गहरी रुचि है.

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