आज है पद्मिनी एकादशी, पढ़ें विष्णु भगवान की चमत्कारी आरती और ये मंत्र

Padmini Ekadashi 2026: पद्मिनी एकादशी 2026 पर भगवान विष्णु की पूजा, आरती और मंत्र जाप का विशेष महत्व है. जानिए व्रत का पुण्य, श्री हरि की आरती और चमत्कारी मंत्रों के बारे में.

Padmini Ekadashi 2026: पद्मिनी एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में बेहद शुभ और पुण्यदायी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से व्यक्ति के जीवन के सभी दुख, कष्ट और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है तथा घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है. कहा जाता है कि पद्मिनी एकादशी का फल हजारों यज्ञ और तीर्थ स्नान के बराबर माना गया है. वर्ष 2026 में यह पावन व्रत 27 मई को रखा जा रहा है. इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा विशेष रूप से की जाती है. पद्मिनी एकादशी पर पूजा करते समय अगर आप विष्णु भगवान की आरती और मंत्रों का जाप करेंगे तो फल दोगुना हो जाता है. सच्चे मन से श्री हरि की आरती गाएं और सही उच्चारण के साथ मंत्रों का जाप करें. आइए पढ़ते हैं विष्णु भगवान की आरती और मंत्र.

विष्णु भगवान की आरती

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय…॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय…॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…॥

दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय…॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय…॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय…॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय…॥

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विष्णु भगवान के मंत्र:

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।
हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।

ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।

ॐ विष्णवे नम:

ॐ हूं विष्णवे नम:

ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि।

धन-वैभव एवं संपन्नता का मंत्र-

ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।
ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि

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Published by: Shaurya punj

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