Muharram 2026: रांची में मुहर्रम को शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और भाईचारे के माहौल में मनाने की तैयारियां तेज हो गई हैं. इसी क्रम में गुरुवार को रांची सेंट्रल मुहर्रम कमेटी और इमाम बख्श अखाड़ा की ओर से मेन रोड स्थित मधुबन मार्केट के पास एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता इमाम बख्श अखाड़ा के प्रमुख खलीफा मोहम्मद महजूद ने की. समारोह में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों को पगड़ी बांधकर और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया.
खलीफा मोहम्मद महजूद ने कहा कि रांची की पहचान आपसी सद्भाव, धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक एकता से रही है. यहां सभी समुदायों के लोग एक-दूसरे के धार्मिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं. इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी मुहर्रम का जुलूस शांति, भाईचारे और पूरी अनुशासन व्यवस्था के साथ निकाला जाएगा. उन्होंने लोगों से अपील की कि मुहर्रम के अवसर पर शांति और आपसी सम्मान की भावना को सर्वोपरि रखें.
कई पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता हुए सम्मानित
सम्मान समारोह में कोतवाली एएसपी निखिल राय, सिटी डीएसपी केवी रमन, कोतवाली थाना प्रभारी सनोज कुमार, डेली मार्केट थाना प्रभारी दिग्विजय सिंह, हिंदपीढ़ी थाना प्रभारी रंजीत कुमार और लोअर बाजार थाना प्रभारी लव कुमार को सम्मानित किया गया. इसके अलावा महावीर मंडल रांची के अध्यक्ष सागर वर्मा, पूर्व अध्यक्ष जय सिंह यादव और अन्य सामाजिक प्रतिनिधियों को भी सम्मान दिया गया. कार्यक्रम में सेंट्रल मुहर्रम कमेटी के अध्यक्ष जमशेद अली उर्फ पप्पू गद्दी, महासचिव अकीलुर्रहमान, प्रवक्ता मोहम्मद इस्लाम सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे.
शहादत-ए-इमाम हुसैन की याद में निकला मातमी जुलूस
दूसरी ओर, शहादत-ए-इमाम हुसैन और शहीदान-ए-कर्बला की याद में शिया समुदाय की ओर से 9वीं मोहर्रम यानी शब-ए-आशूर के मौके पर गुरुवार को मातमी जुलूस निकाला गया. यह जुलूस विश्वकर्मा मंदिर लेन स्थित अनवर आर्केड से शुरू हुआ और अपने पारंपरिक मार्ग से गुजरते हुए मेन रोड, अंजुमन प्लाजा चौक, डॉ. फतहउल्लाह रोड, विक्रांत चौक होते हुए मस्जिद-ए-जाफरिया पहुंचा. जुलूस में शामिल अजादारों ने इमाम हुसैन की शहादत की याद में सीनाजनी की और “हाय हुसैन, प्यासे हुसैन” के नारों से माहौल गमगीन हो उठा.
10 मोहर्रम को निकलेगा मुख्य मातमी जुलूस
मस्जिद जाफरिया की ओर से जानकारी दी गई कि 10 मोहर्रम, शुक्रवार को बाद नमाज जुमा दोपहर 1:30 बजे मुख्य मातमी जुलूस निकाला जाएगा. इस जुलूस में ताबूत, अलम और झूला शामिल होंगे. दोपहर 3 बजे टैक्सी स्टैंड पर मौलाना सैयद तहजीबुल हसन रिजवी देश और राज्य की अमन-चैन, इंसाफ और इंसानियत के लिए संबोधन देंगे.
शबे आशूर को बताया कर्बला की सबसे दर्दनाक रात
अनवर आर्केड में आयोजित मजलिस-ए-शबे आशूर को संबोधित करते हुए मस्जिद जाफरिया रांची के इमाम व खतीब हजरत मौलाना सैयद तहजीबुल हसन रिजवी ने कहा कि शबे आशूर कर्बला की सबसे मार्मिक और निर्णायक रात थी. उन्होंने बताया कि 1400 वर्ष पहले कर्बला के मैदान में इसी रात माताएं अपने बच्चों को अंतिम बार सजा-संवार रही थीं और हजरत इमाम हुसैन अपने खेमों से रुखसत हो रहे थे. उनके संबोधन ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया. मजलिस में आगा जफर, कमर अहमद, कासिम अली, असगर इमाम, डॉ. मुबारक समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे.
