Masik Shivratri 2026: आज, 17 मार्च 2026 को चैत्र मास की मासिक शिवरात्रि है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव को समर्पित यह व्रत किया जाता है. माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और महादेव की उपासना करने से जीवन की बड़ी से बड़ी मुश्किलें समाप्त हो जाती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. कई कुवारी कन्याएँ इस व्रत को मन चाहें वर की प्राप्ति और विवाहित जोड़े अपने दांपत्य जीवन में खुशहाली के लिए करती हैं.
चैत्र मासिक शिवरात्रि शुभ मुहूर्त
चैत्र मासिक शिवरात्रि की पूजा का सबसे महत्व निशिता काल (अर्धरात्रि) में होता है.
- चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 16 मार्च 2026, शाम 07:12 बजे से
- चतुर्दशी तिथि समाप्त: 17 मार्च 2026, रात 08:30 बजे तक
- निशिता काल पूजा समय: रात 12:05 से रात 12:54 तक (17-18 मार्च की मध्यरात्रि)
चैत्र मासिक शिवरात्रि पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और शिव मंदिर जाकर या घर पर ही शिव जी के सामने व्रत का संकल्प लें.
- शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें.
- शिव जी को बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, फल और मिठाई अर्पित करें.
- घी का दीपक जलाएं और चंदन का तिलक लगाएं.
- महादेव के मंत्रों का जाप करें.
- व्रत कथा और चालीसा का पाठ करें.
- अंत में घी के कपूर से आरती करें.
भगवान शिव के मंत्र
पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप अत्यंत फलदायी माना जाता है:
- शिव मूल मंत्र
ॐ नमः शिवाय॥ - महामृत्युञ्जय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ - रुद्र गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ - शिव गायत्री मंत्र
ॐ महादेवाय विद्महे रुद्रमूर्तये धीमहि
तन्नः शिवः प्रचोदयात्॥ - मृत्युञ्जय महादेव मंत्र
ॐ मृत्युञ्जय महादेव त्राहि मां शरणागतम्.
जन्म-मृत्यु-जरा-व्याधिपीडितं कर्मबन्धनैः॥ - दक्षिणामूर्ति शिव मंत्र
ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्तये.
मह्यं मेधां प्रज्ञां प्रयच्छ स्वाहा॥
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