आज मासिक दुर्गाष्टमी पर मां दुर्गा की आरती से बरसेगी कृपा, दूर होंगे कष्ट

Masik Durgashtami 2026: मासिक दुर्गाष्टमी के दिन मां दुर्गा की पूजा के अंत में आरती अवश्य करें. हिंदू धर्म में आरती का विशेष महत्व माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आरती के बिना पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती. इसलिए मां दुर्गा की पूजा के बाद श्रद्धा और भक्ति भाव से उनकी आरती जरूर करें.

Masik Durgashtami 2026: आज, 22 जून 2026 (सोमवार) को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पवित्र मासिक दुर्गाष्टमी मनाई जा रही है. हिंदू धर्म में मासिक दुर्गाष्टमी का विशेष महत्व माना जाता है. यह पर्व प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस शुभ दिन पर शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की पूजा-अर्चना, व्रत और आरती करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है. मान्यता है कि मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत और इसके नियमों का पालन गृहस्थ जीवन जीने वालों के लिए एक सुरक्षा कवच के समान कार्य करता है, जो नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर जीवन की बाधाओं और अवरोधों का नाश करता है.

मां दुर्गा की आरती

ॐ जय अम्बे गौरी…

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी .
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को .
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै .
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी .
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती .
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती .
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे .
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी .
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों .
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता,
भक्तन की दुख हरता . सुख संपति करता ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

भुजा चार अति शोभित, खडग खप्पर धारी .
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती .
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे .
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी .

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Published by: Neha Kumari

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