आधा भारत नहीं जानता महाशिवरात्रि की शुरुआत का यह राज, जानें पौराणिक कथाओं में छिपा ये रहस्य

Mahashivratri 2026: हर साल महादेव के भक्त धूमधाम से महाशिवरात्रि का पर्व मनाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह महापर्व क्यों मनाया जाता है या इसकी शुरुआत कैसे हुई? अगर नहीं, तो आप सही जगह आए हैं. आपके मन में उठ रहे इन सभी सवालों के जवाब इस आर्टिकल के माध्यम से जानेंगे.

Mahashivratri 2026: इस साल महाशिवरात्रि का पावन पर्व 15 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा. यह पर्व भगवान शंकर को समर्पित है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन जो भी भक्त विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा और व्रत करता है, महादेव उसकी हर मनोकामना पूर्ण करते हैं. महाशिवरात्रि की शुरुआत को लेकर कई प्रचलित कथाएं हैं, जिनमें से एक के बारे में आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से बताएंगे.

पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि के सृजनकर्ता भगवान ब्रह्मा और पालनकर्ता भगवान विष्णु के बीच एक बार अपनी श्रेष्ठता को लेकर विवाद शुरू हो गया. यह विवाद धीरे-धीरे बढ़ता गया और युद्ध में बदल गया, जिससे जगत में हाहाकार मच गया. देवताओं की चिंता बढ़ने लगी कि यदि यह युद्ध नहीं रुका, तो सृष्टि का विनाश हो जाएगा.

भगवान शंकर ज्योतिर्लिंग के रूप में हुए प्रकट

जब विवाद चरम पर था, तब संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव एक विशाल और अनंत ‘ज्योतिर्लिंग’ के रूप में प्रकट हुए. इस ज्योतिर्लिंग का न कोई आदि था और न ही अंत. इसकी विशालता ने सभी को हैरान कर दिया. जिज्ञासा में आकर भगवान विष्णु वराह (सूअर) का रूप लेकर इसकी गहराई खोजने लगे, वहीं ब्रह्मा हंस का रूप लेकर इसकी ऊंचाई तक पहुंचने का प्रयास करने लगे.

भगवान विष्णु और ब्रह्मा का अहंकार हुआ नष्ट

कई युगों तक प्रयास करने के बाद भी दोनों देवताओं को उस ज्योतिर्लिंग का छोर नहीं मिला. इससे दोनों के बीच उत्पन्न अहंकार की भावना शांत हो गई. दोनों ने शिव की महिमा स्वीकार कर उस दिव्य प्रकाश को प्रणाम किया. तभी उस अनंत प्रकाश के भीतर से दिव्य ‘ॐ’ की ध्वनि गूंज उठी.

इस रूप में सामने आए महादेव

उस ज्योतिर्लिंग के मध्य तीन अक्षर प्रकट हुए— दाहिनी ओर सूर्य के समान तेजस्वी ‘अ’, बाईं ओर अग्नि सदृश ‘उ’ और मध्य में चंद्रमा की शीतलता लिए ‘म’. इन अक्षरों के बीच साक्षात महादेव स्फटिक (चमकदार, साफ पत्थर) के समान निर्मल रूप में प्रकट हुए. भगवान शिव की इस महिमा को देख ब्रह्मा और विष्णु भाव-विभोर हो गए और उनकी स्तुति करने लगे.

महाशिवरात्रि की हुई शुरुआत

महादेव ने दोनों की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद दिया. मान्यता है कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी के दिन ही शिव पहली बार ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे. इसी पावन स्मृति में हर वर्ष ‘महाशिवरात्रि’ का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है.

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लेखक के बारे में

Published by: Neha Kumari

नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें लेखन के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. पिछले छह महीनों से वे राशिफल और धर्म से जुड़ी खबरों पर काम कर रही हैं. उनका मुख्य कार्य व्रत-त्योहारों, पौराणिक कथाओं और भारतीय रीति-रिवाजों से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. नेहा का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वे कठिन से कठिन विषय को भी इतना आसान और रोचक बना दें कि हर कोई उसे सहजता से पढ़ और समझ सके. उनका मानना है कि यदि धर्म और संस्कृति से जुड़ी जानकारी सरल शब्दों में मिले, तो लोग अपनी परंपराओं से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं. डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने प्रभात खबर में ही ‘नेशनल’ और ‘वर्ल्ड’ डेस्क पर छह महीने की इंटर्नशिप के साथ की थी. इस दौरान उन्होंने रियल-टाइम खबरों पर काम करना, तेजी और सटीकता के साथ कंटेंट लिखना, ट्रेंडिंग विषयों की पहचान करना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उनकी न्यूज़ सेंस, लेखन क्षमता और खबरों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की समझ को और अधिक मजबूत बनाया.

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