Jagannath Rath Yatra 2026: गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई. शाम 5:25 बजे महाप्रभु भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर विराजमान होकर मौसीबाड़ी के लिए रवाना हुए. इस पावन यात्रा में लगभग डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए और पूरे मार्ग में "जय जगन्नाथ" के जयघोष गूंजते रहे. रथ शाम लगभग सात बजे मौसीबाड़ी पहुंचा, जहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भगवान का स्वागत किया गया. विलंब होने के कारण आवश्यक धार्मिक अनुष्ठान शीघ्रता से संपन्न कराए गए. इसके बाद भगवान का विशेष श्रृंगार, मंगल आरती, जगन्नाथ अष्टकम का पाठ और महाभोग अर्पित किया गया.
विशिष्ट अतिथियों की रही उपस्थिति
रथयात्रा महोत्सव में अनेक गणमान्य अतिथियों ने भाग लेकर आयोजन की गरिमा बढ़ाई. राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक, महापौर, उपमहापौर, पूर्व केंद्रीय मंत्री, न्यायमूर्ति तथा मंदिर प्रबंधन समिति के पदाधिकारी इस अवसर पर उपस्थित रहे. मुख्य पुजारी एवं अन्य वैदिक विद्वानों ने विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न कराई. प्रशासन और स्वयंसेवकों ने श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित की.
मेले में सजी सैकड़ों दुकानें
रथयात्रा के साथ आयोजित मेले में 400 से अधिक दुकानों ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित किया. स्थानीय व्यापारियों के साथ बिहार, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से आए दुकानदार भी शामिल हुए. आयोजकों के अनुसार मेले का ठेका 2.27 करोड़ रुपये में दिया गया है. मौसम और वर्षा की स्थिति को देखते हुए आने वाले दिनों में कारोबार का सही अनुमान लगाया जाएगा, लेकिन अच्छी आर्थिक गतिविधि की उम्मीद जताई जा रही है.
मौसीबाड़ी में विशेष पूजा और दर्शन
मौसीबाड़ी में भगवान की विशेष पूजा प्रतिदिन प्रातः पांच बजे से प्रारंभ होगी. दोपहर तक श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे, जिसके बाद अन्न भोग अर्पित कर मंदिर के पट बंद किए जाएंगे. अपराह्न में पुनः दर्शन प्रारंभ होंगे और रात्रि में आरती एवं भोग का आयोजन होगा. यह क्रम निर्धारित तिथि तक जारी रहेगा. विशेष अवसर पर गुंडिचा भोग भी अर्पित किया जाएगा, जिसका धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना जाता है.
श्रद्धालुओं की उमड़ी भारी भीड़
रथयात्रा से पहले ही मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गई थीं. सुबह तड़के से ही भक्त भगवान के दर्शन के लिए पहुंचने लगे. भगवान के विग्रहों का आकर्षक श्रृंगार कर उन्हें रथ पर विराजमान किया गया. इसके बाद हजारों श्रद्धालुओं ने तीन विशाल रस्सियों की सहायता से रथ को खींचते हुए मौसीबाड़ी तक पहुंचाया. पूरे मार्ग में भक्ति, उत्साह और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला.
