Gemstone Astrology: कौन सा रत्न किस उंगली और धातु में पहनना शुभ? जानें माणिक से नीलम तक की पूरी जानकारी

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर रत्न किसी न किसी ग्रह से जुड़ा होता है. अपनी कुंडली के अनुसार सही रत्न पहनना आपके जीवन में सुख-समृद्धि ला सकता है. जानिए नौ प्रमुख रत्नों और उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण बातें.

Gemstone Astrology: ज्योतिष शास्त्र में रत्नों को ग्रहों से संबंधित माना गया है. कुंडली में किसी ग्रह की स्थिति कमजोर होने पर उससे जुड़े रत्न को धारण करने की सलाह दी जाती है. हालांकि, रत्न धारण करने से पहले यह जानना जरूरी है कि कौन सा रत्न किस ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है और उसे किस उंगली व धातु में धारण करना शुभ माना जाता है. ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा से जानते हैं नौ प्रमुख रत्नों और उनसे जुड़ी जरूरी बातों के बारे में.

कौन सा रत्न किस उंगली और धातु में पहनना शुभ माना जाता है?

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सूर्य का रत्न है माणिक

माणिक को सूर्य ग्रह का रत्न माना जाता है. ज्योतिष में सूर्य को आत्मविश्वास, मान-सम्मान, नेतृत्व और पिता का कारक बताया गया है. माणिक अनामिका उंगली में सोने की अंगूठी में धारण किया जाता है. इसे पहनने से पहले कुंडली में सूर्य की स्थिति देखना जरूरी है.

चंद्रमा का रत्न है मोती

मोती का संबंध चंद्रमा से माना जाता है. ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति का कारक बताया गया है. मोती कनिष्ठिका उंगली में चांदी की अंगूठी में धारण किया जाता है. कुंडली में चंद्रमा की स्थिति के आधार पर मोती पहनने की सलाह दी जाती है.

मंगल का रत्न है मूंगा

मूंगा मंगल ग्रह से संबंधित रत्न माना जाता है. मंगल को साहस, ऊर्जा, पराक्रम और आत्मबल से जोड़कर देखा जाता है. मूंगा अनामिका उंगली में सोने, पंचधातु या तांबे की अंगूठी में धारण किया जाता है.

बुध का रत्न है पन्ना

पन्ना बुध ग्रह का रत्न माना जाता है. ज्योतिष में बुध को बुद्धि, वाणी, तर्क और संचार का कारक बताया गया है. पन्ना कनिष्ठिका उंगली में सोने या चांदी की अंगूठी में धारण किया जाता है.

गुरु का रत्न है पुखराज

पुखराज को बृहस्पति यानी गुरु ग्रह का रत्न माना जाता है. गुरु को ज्ञान, शिक्षा, धर्म, विवाह और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है. पुखराज तर्जनी उंगली में सोने की अंगूठी में धारण किया जाता है.

शुक्र का रत्न है हीरा

हीरे का संबंध शुक्र ग्रह से माना जाता है. ज्योतिष में शुक्र को प्रेम, सौंदर्य, कला, सुख-सुविधा और भौतिक सुखों का कारक बताया गया है. हीरा अनामिका उंगली में सोने या चांदी की अंगूठी में धारण किया जाता है.

शनि का रत्न है नीलम

नीलम को शनि ग्रह का प्रमुख रत्न माना जाता है. ज्योतिष में शनि को कर्म, अनुशासन, मेहनत और न्याय से जोड़कर देखा जाता है. नीलम मध्यमा उंगली में चांदी की अंगूठी में धारण किया जाता है. इसे पहनने से पहले कुंडली की जांच कराने की सलाह दी जाती है.

राहु का रत्न है गोमेद

गोमेद को राहु से संबंधित रत्न माना जाता है. इसे मध्यमा उंगली में चांदी या पंचधातु में धारण किया जाता है. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार गोमेद धारण करने से मानसिक तनाव, पारिवारिक और वैवाहिक कलह, व्यापार या नौकरी में आने वाली रुकावटों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से राहत मिल सकती है.

केतु का रत्न है लहसुनिया

लहसुनिया को केतु का रत्न माना जाता है. इसे मध्यमा उंगली में चांदी या पंचधातु में धारण किया जाता है. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार लहसुनिया अचानक आने वाली विपत्तियों, भय और दुर्घटनाओं से बचाव में सहायक माना जाता है.

रत्न पहनने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

रत्न धारण करने से पहले कुंडली की जांच करानी चाहिए. शुभ और कारक ग्रह का रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है, जबकि मारक, बाधक या अशुभ ग्रह से संबंधित रत्न पहनने को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए. लसाथ ही रत्न को शुभ मुहूर्त में धारण करना चाहिए. अमावस्या, ग्रहण और संक्रांति के दिन रत्न धारण करने से बचना चाहिए. बिना किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी की सलाह के रत्न धारण नहीं करना चाहिए.

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लेखक के बारे में

By नेहा कुमारी

नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.

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