Kalashtami Vrat 2026: हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है. यह पर्व भगवान शिव के रौद्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित है. मान्यता है कि कालाष्टमी के दिन जो भी भक्त सच्चे मन से भगवान काल भैरव की आराधना करता है और व्रत रखता है, उसके जीवन से दुख-दर्द दूर होते हैं, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है.
चैत्र कालाष्टमी 2026 पूजा शुभ मुहूर्त
इस बार पूजा के लिए शुभ मुहूर्त इस प्रकार रहेगा—
- पूजा के शुभ मुहूर्त की शुरुआत: 11 मार्च की रात 11:35 बजे से
- शुभ मुहूर्त की समाप्ति: 11-12 मार्च की मध्यरात्रि 12:45 बजे तक
कालाष्टमी पूजा विधि
काल भैरव की पूजा मुख्य रूप से रात के समय की जाती है, लेकिन सुबह से ही नियमों का पालन शुरू हो जाता है.
- स्नान और संकल्प: पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लें.
- दीपक जलाएं: भगवान भैरव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं.
- ध्यान और मानसिक साधना: दिन भर भगवान भैरव और भगवान शिव का ध्यान करें और मानसिक साधना करें.
- अर्पण: रात के समय पूजा करते हुए सबसे पहले जल अर्पित करें. इसके बाद पंचामृत अर्पित करें. फिर काले तिल, नीले फूल और धूप-दीप अर्पित करें.
- मंत्र जाप: भगवान काल भैरव के मंत्रों का जाप करें—
“ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं”
“ॐ कालभैरवाय नमः”
- चालीसा: भगवान भैरव की चालीसा का पाठ करें.
- आरती: अंत में काल भैरव की आरती कर पूजा का समापन करें.
भोग
- इमरती और जलेबी: मान्यता है कि भैरव बाबा को मीठी इमरती बहुत प्रिय है, इसलिए इस दिन भोग में इसे जरूर शामिल करें.
- दही-बड़ा: इस दिन उड़द दाल के बड़े और दही का भोग लगाना भी बेहद फलदायक माना गया है.
- मालपुआ: इस दिन कई लोग भगवान काल भैरव को मीठे पुए या मालपुआ का भोग भी लगाते हैं.
यहां पढ़ें धर्म से जुड़ी बड़ी खबरें: Religion News in Hindi – Spiritual News, Hindi Religion News, Today Panchang, Astrology at Prabhat Khabar
