Kalashtami 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का व्रत रखा जाता है. वर्ष 2026 में वैशाख माह की कालाष्टमी 9 अप्रैल, गुरुवार को मनाई जाएगी. यह दिन भगवान शिव के रौद्र अवतार, भगवान काल भैरव को समर्पित है. तंत्र-मंत्र की साधना और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए यह तिथि अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है.
शुभ मुहूर्त और तिथि
काशी विश्वनाथ पंचांग के अनुसार, वैशाख कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का समय इस प्रकार रहेगा:
- अष्टमी तिथि का प्रारंभ: 9 अप्रैल 2026 को शाम 06:01 बजे से
- अष्टमी तिथि का समापन: 10 अप्रैल 2026 को शाम 07:35 बजे तक
- काल भैरव की पूजा: 9 अप्रैल की रात को किया जाएगी.
धार्मिक महत्व: क्यों खास है यह दिन?
कालाष्टमी का व्रत भय, बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा के नाश के लिए किया जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने ब्रह्मा जी के अहंकार को नष्ट करने के लिए काल भैरव का रूप धारण किया था.
इन्हें ‘काशी का कोतवाल’ और ‘समय का स्वामी’ भी कहा जाता है. मान्यता है कि जो भक्त इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखते हैं, उन्हें अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है और कुंडली के शनि व राहु दोष शांत होते हैं.
भगवान भैरव पूजन विधि
- सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें.
- भगवान भैरव के सामने सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं.
- उन्हें काले तिल, उड़द की दाल और ऋतु फल अर्पित करें.
- ‘ॐ कालभैरवाय नमः’ मंत्र का जाप करें.
- कालाष्टमी की व्रत कथा का पाठ करें, इससे मानसिक शांति प्राप्त होती है.
- काल भैरव का वाहन कुत्ता माना जाता है, इसलिए इस दिन काले कुत्ते को भोजन कराना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है.
सावधानियां
कालाष्टमी के दिन तामसिक भोजन जैसे प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा से पूरी तरह परहेज करना चाहिए. साथ ही, इस दिन किसी भी जीव को नुकसान न पहुंचाएं और झूठ बोलने से बचें. यह दिन आध्यात्मिक शक्ति और आत्म-अनुशासन को बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है.
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