Purnima 2026: सनातन धर्म में अधिक मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व है. शास्त्रों में इस पूर्णिमा को ‘सर्व सिद्धिदायिनी पूर्णिमा’ कहा गया है, क्योंकि यह साक्षात भगवान विष्णु को समर्पित महीने में आती है. इस साल ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पर रवि योग समेत कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जिस कारण कहा जा रहा है कि इस दिन किए गए जप, तप, स्नान और दान का फल कई गुना अधिक बढ़ जाता है.
पूर्णिमा के दिन क्या करें?
- भगवान पुरुषोत्तम (विष्णु जी) को पीला रंग अत्यंत प्रिय है. इस दिन स्नान के बाद किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को चने की दाल, पीले फल, पीले वस्त्र, हल्दी या धार्मिक पुस्तकों का दान करें.
- इस दिन पवित्र नदी में स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है. हालांकि, यदि आप नदी में जाकर स्नान करने में सक्षम नहीं हैं, तो सुबह अपने नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें. इससे गुरु ग्रह मजबूत होता है.
- पूर्णिमा की शाम को घर के मुख्य द्वार पर और तुलसी के पौधे के पास गाय के घी का दीपक अवश्य जलाएं. इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और मां लक्ष्मी का आगमन होता है.
- इस दिन चंद्रमा को जल में थोड़ा सा कच्चा दूध, अक्षत (चावल) और सफेद फूल मिलाकर अर्घ्य दें. इससे मानसिक तनाव दूर होता है और सुख-शांति आती है.
पूर्णिमा के दिन क्या न करें?
- इस दिन घर में भूलकर भी मांस, मदिरा, अंडा, प्याज या लहसुन का सेवन न करें और न ही इन्हें घर में लाएं. इस दिन पूर्ण रूप से सात्विक और हल्का भोजन ही करना चाहिए.
- पूर्णिमा के दिन चंद्रमा का प्रभाव मस्तिष्क पर बहुत गहरा होता है, जिससे भावनाएं उग्र हो सकती हैं. इसलिए किसी पर क्रोध न करें, अपशब्द न बोलें और घर में क्लेश की स्थिति न बनने दें.
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र तिथि पर बाल कटवाना, नाखून काटना या दाढ़ी बनवाना अशुभ माना जाता है.
- पूर्णिमा के दिन दोपहर के समय (मध्याह्न) सोने की मनाही होती है. इस समय को ईश्वर की आराधना, मंत्र जाप या धार्मिक पुस्तकें पढ़ने में बिताना चाहिए.
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