Janmashtami 2026: आज भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की तिथि यानी 4 सितंबर 2026 को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है. यह त्योहार कृष्ण पक्ष की अष्टमी या भाद्रपद महीने के आठवें दिन पड़ता है. इसे गोकुल अष्टमी भी कहा जाता है. जानें पंडित पुरनेंदु पाठक से जन्माष्टमी की पूजन विधि, शुभ मुहूर्त और व्रत के नियम
जन्माष्टमी 2026 व्रत शुभ मुहूर्त?
पंचांग के अनुसार, जन्माष्टमी पर निशीथ काल की पूजा का मुहूर्त 4 सितंबर को मध्यरात्रि 11 बजकर 26 मिनट से 12 बजकर 12 मिनट तक है. जबकि वृषभ लग्न रात 9 बजकर 43 मिनट से 11 बजकर 40 मिनट तक रहेगा. इस साल निशीथ काल की पूजा के लिए 46 मिनट का समय मिलेगा.
दिन की शुरुआत इस प्रकार करें
- ब्रह्म मुहूर्त या प्रातःकाल जल्दी उठें और स्नान-जल आदि से शुद्ध होकर स्वच्छ व पवित्र वस्त्र पहनें.
- घर के पूजा स्थान या मंदिर को गंगाजल से शुद्ध कर पूरी सफाई करें.
- पूजा स्थल पर सुबह से ही दीपक जलाकर शुभ वातावरण बनाएं.
- घर में स्थापित समस्त देवी-देवताओं का जलाभिषेक करें.
लड्डू गोपाल की विधिपूर्वक सेवा
- जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल-स्वरूप 'लड्डू गोपाल' की विशेष पूजा की जाती है.
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- लड्डू गोपाल का पहले जलाभिषेक करें, फिर उन्हें नए और स्वच्छ वस्त्र अर्पित करें.
- कान्हा को सुंदर झूले पर विराजमान कर उनका झूला झुलाएं.
- अपनी श्रद्धा-क्षमता के अनुसार माखन, मिश्री, मेवे जैसे सात्त्विक भोग लगाएं.
- पूरे दिन लड्डू गोपाल को अपने पुत्र की तरह सेवा दें और उनका पूर्ण ध्यान रखें.
रात्रि पूजा का विशेष महत्व
- भगवान श्रीकृष्ण का जन्म आधी रात को हुआ था, इसलिए निशिकालीन पूजा का महत्व सर्वाधिक है.
- रात्रि में बाल गोपाल की विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और महा आरती करें.
- जन्म के समय घंटियां, शंख और मंत्रोच्चार के साथ उत्सव मनाएं.
जन्माष्टमी के दिन इन नियमों का पालन करें
गाय पूजा अवश्य करें: इस दिन श्रीकृष्ण की पूजा के साथ गाय माता की भी आराधना करें.
मूर्ति स्थापना: पूजा स्थल पर श्रीकृष्ण की मूर्ति के समीप गाय की मूर्ति भी रखें.
आसन का विशेष ध्यान: पूजा हमेशा स्वच्छ, सुंदर और पवित्र आसन पर बैठकर ही करें.
अभिषेक: भगवान श्रीकृष्ण को गंगा जल से अभिषेक अवश्य करें.
पवित्र द्रव्य का प्रयोग: पूजा में केवल गाय के दूध से बने घी का ही उपयोग करें.
